अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को ‘लिबरेशन डे’ के रूप में घोषित करते हुए वैश्विक व्यापार नीतियों में बड़े बदलाव की घोषणा की। उन्होंने सभी आयातित वस्तुओं पर 10% का सार्वभौमिक शुल्क और कुछ देशों पर अतिरिक्त ‘पारस्परिक शुल्क’ लगाने की योजना प्रस्तुत की। ट्रंप ने कहा कि दशकों से अन्य देशों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था का ‘लूट, डकैती, बलात्कार, और लूटपाट’ किया है, और ये नए शुल्क अमेरिकी उद्योगों को पुनर्जीवित करने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए आवश्यक हैं।
इन नए शुल्कों के तहत, चीन से आयातित वस्तुओं पर 34%, जापान पर 24%, और यूरोपीय संघ से आयात पर 20% शुल्क लगाया जाएगा। कनाडा और मैक्सिको को कुछ छूट दी गई है, लेकिन गैर-अनुपालन वाले उत्पादों पर 25% शुल्क लागू होगा।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन उपायों से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और नौकरियों का सृजन होगा। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इनसे उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि हो सकती है और वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है। कई देशों ने इन शुल्कों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन शुल्कों से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है और वैश्विक व्यापार प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी शेयर बाजारों में भी इस घोषणा के बाद गिरावट देखी गई है।