यूपी चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर की ‘ब्लैकमेलिंग’ से नतमस्तक भाजपा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा सियासी पिच पर अपनी ‘बिसात’ बिछाने में लगी हुई हैं. इसके साथ इन राजनीतिक दलों में जातियों को लेकर भी नफा नुकसान का ‘आकलन’ कर रहे हैं. जहां बसपा दलितों के साथ ब्राह्मण वोटरों पर नजर लगाए हुए हैं वहीं सपा पिछड़ों के साथ मुसलमानों और ब्राह्मणों पर आकर टिक गई है.

वहीं कांग्रेस मुसलमानों, दलितों और पिछड़ा वर्ग को साधने में लगी हुई है. अब भाजपा भी प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने से पहले ओबीसी समाज के साथ खड़ा होना चाहती है. भाजपा के रणनीतिकार जान रहे हैं कि ओबीसी समाज का एक बड़ा वर्ग समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोटर माने जाते हैं.

इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर के आगे एक बार फिर से ‘बीन’ बजाई हैं. कुछ दिनों पहले तक ओमप्रकाश राजभर भाजपा पर लगातार हमला करते रहे हैं यही नहीं उन्होंने साल 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ‘नेस्तनाबूद’ करने की कसम भी खाई थी.

बात को आगे बढ़ाने से पहले यह भी जान लेते हैं कि साल 2017 के यूपी के विधानसभा चुनाव में राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और भाजपा गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी. उसके बाद योगी सरकार में ओपी राजभर को कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया. लेकिन ‘साल 2019 में भाजपा विरोधी बयानों की वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओमप्रकाश राजभर को अपने कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था’.

तभी से वे प्रदेश में भाजपा के ‘धुर विरोधी’ हो गए थे. उसके बाद उन्होंने छोटी-छोटी 10 पार्टियों के साथ ‘भागीदारी संकल्प मोर्चा’ बना लिया. हाल के वर्षों में राजभर ने पूर्वांचल के कई जिलों में पिछड़ा वर्ग में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. भाजपा भी अब उन्हीं के सहारे ओबीसी को अपने पाले में लाने के लिए ‘जुगाड़’ में लगी हुई है. जब ओपी राजभर को लगा कि भाजपा को चुनाव से पहले उनकी जरूरत है तो उन्होंने अपनी ‘ब्लैकमेलिंग’ भी शुरू कर दी है. अब दोनों ओर से ‘मित्रता’ के हाथ बढ़ाए जा रहे हैं.

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

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