मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद से अबतक विभिन्न आरोपों में विदेशों में कैद 10,000 से अधिक भारतीयों की रिहाई और क्षमादान के लिए सक्रिय और सतत कूटनीतिक प्रयास किये, जिसकी वजह से इनकी स्वदेश वापसी हुई. शुक्रवार (28 मार्च, 2025) को आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस्लामी पवित्र महीने रमजान में करीब 500 भारतीय कैदियों को माफ करने से भारत और खाड़ी देश के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का पता चलता है.
एक अधिकारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 2014 में आने के बाद से विदेश में भारतीय नागरिकों के कल्याण को प्राथमिकता दी और कूटनीतिक वार्ता और उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप के माध्यम से विदेशों में कैद करीब 10,000 भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की.’
अधिकारियों ने बताया कि राजनयिक प्रयासों के कारण भारतीय नागरिकों की रिहाई के प्रमुख उदाहरणों में 2022 में यूएई से 2,783 भारतीय कैदियों की रिहाई और सऊदी अरब में 850 कैदियों की रिहाई शामिल है. सऊदी किंग मोहम्मद बिन सलमान ने 2019 में अपनी भारत यात्रा के दौरान भारतीय कैदियों की रिहाई का आदेश दिया था.
सूत्रों ने बताया कि कतर ने साल 2023 में मौत की सजा पाए भारतीय नौसेना के पूर्व सैनिकों को रिहा किया था, जो भारतीय कैदियों की रिहाई की एक अहम घटना रही. उन्होंने बताया कि आठ पूर्व सैनिकों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी और भारत के कूटनीतिक हस्तक्षेप के कारण उनकी सजा कम कर दी गई और इसके बाद उनमें से अधिकांश को रिहा कर दिया गया.
सूत्रों ने रेखांकित किया कि एक अन्य इस्लामिक देश ईरान ने 2024 में 77 भारतीय नागरिकों को और 2023 में 12 मछुआरों समेत 43 को रिहा किया, जबकि बहरीन सरकार ने 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान 250 भारतीय कैदियों को माफ कर दिया था.
उन्होंने बताया कि कुवैत के अमीर ने 2017 में कूटनीतिक बातचीत के बाद 22 भारतीयों को रिहा कर दिया तथा 97 अन्य की सजा कम कर दी.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत के नियमित हस्तक्षेप के कारण श्रीलंका की ओर से भारतीय मछुआरों को नियमित रूप से रिहा किया जाता रहा है और 2014 से अब तक 3,697 मछुआरों को रिहा किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक अथक कूटनीतिक प्रयासों के चलते पाकिस्तान से 2,639 मछुआरों और 71 नागरिक कैदियों की रिहाई सुनिश्चित की गई है. अधिकारियों ने कहा कि इनमें से अधिकतर सफलताएं वैश्विक नेताओं के साथ पीएम मोदी के व्यक्तिगत तालमेल के कारण मिलीं.