केंद्र सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को आज, 2 अप्रैल 2025, लोकसभा में पेश किया। विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्डों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन पंक्ति का व्हिप जारी किया था।
विपक्षी दलों, जैसे कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम), ने इस विधेयक का विरोध किया। उनका आरोप है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सरकार को अत्यधिक हस्तक्षेप की अनुमति देता है। सपा सांसद मोहिबुल्ला ने कहा कि यह हमारे धर्म में दखलअंदाजी है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संविधान की मूल भावना पर हमला बताया।
भाजपा के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने विधेयक का समर्थन किया। जदयू नेता ललन सिंह ने कहा कि यह बिल मुसलमान विरोधी नहीं है और पारदर्शिता लाने के लिए आवश्यक है।
लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) ने विधेयक पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम चाहते हैं कि इस पर विस्तृत चर्चा हो और हर राजनीतिक दल को अपनी राय रखने का अधिकार है।
विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद, सरकार विधेयक को पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और उनके प्रबंधन में सुधार लाने में मदद करेगा।