तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया पर चर्चा के लिए तत्काल बैठक का अनुरोध किया है। यह अनुरोध 22 मार्च, 2025 को चेन्नई में आयोजित ‘निष्पक्ष परिसीमन’ पर संयुक्त कार्रवाई समिति (Joint Action Committee) की बैठक के बाद किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और प्रमुख नेता शामिल हुए थे।
स्टालिन ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि इस बैठक में उठी आवाज़ें राजनीतिक सीमाओं से परे हैं और विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों की चिंताओं को दर्शाती हैं, जो संसदीय लोकतंत्र में निष्पक्ष प्रतिनिधित्व की मांग करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों के साथ मिलकर एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दें, ताकि संयुक्त कार्रवाई समिति की ओर से एक ज्ञापन सौंपा जा सके।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस मुद्दे को राज्यों और नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और प्रधानमंत्री से शीघ्र प्रतिक्रिया की अपेक्षा की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में पारदर्शिता और हितधारकों के साथ परामर्श की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, और यह आवश्यक है कि राज्य सरकारों, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को शामिल करते हुए एक समावेशी संवाद स्थापित किया जाए।
स्टालिन ने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है, उन्हें संसदीय प्रतिनिधित्व में कमी के रूप में दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस मुद्दे पर उचित संवैधानिक संशोधन किए जाएं, ताकि प्रभावी शासन प्रथाओं को हतोत्साहित किए बिना प्रतिनिधित्व में समानता सुनिश्चित की जा सके।