केरल के औषधि नियंत्रण विभाग ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ भ्रामक विज्ञापनों के लिए कार्रवाई की है। कन्नूर के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केवी बाबू की शिकायत पर विभाग ने पतंजलि के 29 विज्ञापनों की पहचान की, जो ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 का उल्लंघन करते हैं। बाबू ने इन विज्ञापनों के माध्यम से संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन आयुष मंत्रालय और उत्तराखंड के अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण उन्होंने केरल ड्रग विभाग से शिकायत की।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने भी पतंजलि को चेतावनी दी थी कि उसके उत्पादों के माध्यम से स्थायी इलाज का दावा करने वाले भ्रामक विज्ञापनों के लिए एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पतंजलि आयुर्वेद ने किसी भी भ्रामक विज्ञापन को जारी करने से इनकार किया है, लेकिन केरल के औषधि नियंत्रण विभाग ने कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह मामला उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों से बचाने और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।