उत्तराखंड सरकार ने उच्च न्यायालय में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में एक हलफनामा दायर किया है, जिसमें राष्ट्रीय एकता, लैंगिक समानता, आपराधिक अपराधों की रोकथाम, और लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों की सुरक्षा जैसे प्रमुख तर्क प्रस्तुत किए गए हैं।
हलफनामे में सरकार ने यूसीसी के तहत लिव-इन संबंधों की अनिवार्य पंजीकरण का समर्थन करते हुए तर्क दिया है कि इससे महिला भागीदारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उनके अधिकारों की रक्षा होगी। इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि यूसीसी का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच समानता स्थापित करना और नागरिकों के व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को दूर करना है।
सरकार ने यह भी उल्लेख किया है कि यूसीसी के प्रावधानों से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और उन्हें समान अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, सरकार ने कहा है कि यूसीसी के तहत लिव-इन संबंधों की पंजीकरण से बच्चों के अधिकारों की भी रक्षा होगी। सरकार ने यह भी कहा है कि यूसीसी के प्रावधानों से आपराधिक अपराधों की रोकथाम में मदद मिलेगी और समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि यूसीसी के तहत लिव-इन संबंधों की पंजीकरण से समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि यूसीसी के प्रावधानों से समाज में समानता और न्याय की स्थापना होगी और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होगी। इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि यूसीसी के तहत लिव-इन संबंधों की पंजीकरण से समाज में स्थिरता और समृद्धि आएगी।