आधार फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली ने अब तक 130.5 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए हैं, जिसमें जनवरी से मार्च 2025 के बीच 39.5 करोड़ लेनदेन शामिल हैं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अनुसार, यह तकनीक विभिन्न क्षेत्रों में पहचान सत्यापन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
फेस ऑथेंटिकेशन का उपयोग बैंकिंग, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), टेलीकॉम, और सरकारी योजनाओं जैसे पीडीएस, सीओवीआईडी-19 टीकाकरण, आयुष्मान भारत योजना आदि में किया जा रहा है। यह प्रणाली वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित हो रही है, जिन्हें फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन में कठिनाई होती है।
UIDAI ने फेस ऑथेंटिकेशन के लिए एक ऐप भी विकसित किया है, जो मोबाइल उपकरणों पर काम करता है, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। यह प्रणाली डिजिटल इंडिया पहल के तहत नागरिकों को सशक्त बनाने और सेवाओं की सुगमता बढ़ाने में सहायक है।
फेस ऑथेंटिकेशन की बढ़ती स्वीकृति और उपयोग से डिजिटल लेनदेन में सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ी है, जिससे नागरिकों को विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने में सुविधा हो रही है।