बुधवार को केंद्र सरकार ने संसद में वक्फ संशोधन बिल पेश किया है.सत्तारूढ़ गठंबधन एनडीए में शामिल सभी दलों ने अपने सदस्यों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. एनडीए के दलों ने अपने सदस्यों को निर्देश दिए हैं कि वे सरकार का समर्थन करें. वहीं, विपक्ष भी इसे लेकर लामबंद हैं.
तमाम राजनीतिक दल के साथ-साथ कई मुस्लिम धर्मगुरू और मुस्लिम संगठन वक्फ बिल के विरोध कर रहे हैं. पक्ष-विपक्ष के विरोध-समर्थन से हटकर हम आपको बताएंगे कि आखिर मुस्लिम संगठन क्यों इसके विरोध में हैं.
कानूनी विवादों में फंसेगी वक्फ की प्रॉपर्टी
नए बिल में कहा गया है कि अगर कोई संपत्ति कानून में बताए गए तरीकों से रजिस्टर नहीं हैं तो वक्फ अमेंडमेंट एक्ट लागू होने के छह माह बाद वक्फ ऐसी किसी भी प्रॉपर्टी की सुनवाई के लिए कोर्ट में नहीं जा सकता. हैदराबाद की एक यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी फैजान मुस्तफा का कहना है कि कई वक्फ 500 से 600 साल पुराने हैं. ऐसे में उनके पास उसके पक्के दस्तावेज नहीं होंगे. मुस्लिमों को अब डर है कि कहीं इस नियम के कारण उनके मस्जिद, स्कूल, मदरसे और कब्रिस्तान कानूनी विवादों में फंस जाएंगे.
वक्फ की प्रॉपर्टी पर कब्जे को बढ़ावा मिलेगा
नए बिल में एक्ट की धारा 107 को हटाने और वक्फ की संपत्ति को 1963 के लिमिटेशन एक्ट के दायरे में लाने का प्रावधान है. मुस्लिम जानकार अकरमुल जब्बार खान के अनुसार, अगर किसी ने 12 साल या उससे अधिक समय से वक्फ की संपत्ति पर किसी ने कब्जा किया हुआ है तो लिमिटेशन एक्ट के तहत वक्फ बोर्ड कानूनी मदद नहीं ले सकता है.
सरकार का वक्फ की प्रॉपर्टी पर कंट्रोल होगा
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि नए बिल से वक्फ पर सरकार का कंट्रोल बढ़ेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बिल के कारण कलेक्टर राज शुरू हो जाएगा. वे अपनी मर्जी से ही तय करेंगे कि कौन सी संपत्ति वक्फ प्रोपर्टी है और कौन सी नहीं.
वक्फ में गैर-मुस्लिमों को भी शामिल किया जाएगा
एक्सपर्ट ने कहा कि नए बिल के अनुसार, वक्फ अब सिर्फ वही व्यक्ति कर सकता है, जो व्यक्ति कम से कम पांच वर्ष से इस्लाम का पालन कर रहा हो. साथ में उस व्यक्ति को अब प्रमाण भी देना होगा कि वह पांच साल से इस्लाम को मान रहा है. एक तरफ ऐसा नियम है तो दूसरी ओर वक्फ बोर्ड में गैर मस्लिमों को शामिल कर रहे हैं.
इस्लामिक परंपरा के खिलाफ वक्फनामा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिल में वक्फ बाय यूजर को हटाने का प्रावधान है. ये विवादित है. इस्लामिक परंपरा में कोई भी व्यक्ति सिर्फ मौखिक रूप से ही बिना वक्फनामे के अपनी प्रॉपर्टी को वक्फ कर सकता है. मस्जिदों में मामले में तो ये बहुत सामान्य है. अब नए बिल में कहा गया है कि वक्फ डीड के बिना कोई भी संपत्ति वक्फ नहीं हो सकती हैं.
वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार खत्म होंगे
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए बिल में वक्फ ट्रिब्यूनल्स के अंतिम फैसले लेने का अधिकार हटा दिया गया है. ये तो ठीक वैसा ही हुआ कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT को आखिरी फैसला करने का अधिकार नहीं दिया जाए.