आईएएफ में राफेल के शामिल होने से पाकिस्तान को लगी ‘मिर्ची’, हुक्मरानों में दिखने लगी है बेचैनी

बालाकोट में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की काबिलियत देख चुका पाकिस्तान अब राफेल के आ जाने से बेचैन है. फ्रांस से आए पांच राफेल लड़ाकू विमानों की चर्चा पाकिस्तानी मीडिया में खूब हो रही है. आईएएफ में राफेल के शामिल हो जाने की बात पाकिस्तान हजम नहीं कर पा रहा है और उसे यह बात मिर्ची की तरह लगी है. वह खुलकर तो इस बारे में कुछ नहीं बोल रहा लेकिन उसके हुक्मरानों एवं प्रवक्ताओं की झुंझलाहट से यह बात जाहिर हो जा रही है कि अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने उनकी बेचैनी बढ़ा दी है. फ्रांस से राफेल विमानों के उड़ान भरते समय पाकिस्तानी वायु सेना के चीफ ने सेना प्रमुख जनरल बाजवा से मुलाकात की. अब विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आइशा फारूकी ने राफेल पर बयान दिया है.

अपनी मीडिया ब्रीफिंग में फारूकी ने कहा कि ‘भारत के हाल के सैन्य अधिग्रहण पर पाकिस्तान ने ध्यान दिया है. ये राफेल जेट दोहरी क्षमता वाले तकनीक से युक्त हैं. परमाणु हथियार ले जाने के लिए इनमें परिवर्तन भी किया जा सकता है. जाहिर है कि भारत अपने परमाणु हथियारों को आधुनिक बनाने के साथ ही उनका विस्तार कर रहा है.’ प्रवक्ता ने आगे आरोप लगाते हुए कहा, ‘दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बनकर भारत हिंद महासागर क्षेत्र में परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ा रहा है. भारत अपनी जरूरतों से ज्यादा सैन्य हथियारों की तादाद बढ़ा रहा है जो कि परेशान करने वाला है.’

फ्रांस से 5 लड़ाकू विमान गत बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंचे. इनके आने से भारतीय वायु सेना की ताकत काफी बढ़ गई है. राफेल दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में शुमार होते हैं. 4.5 पीढ़ी के ये लड़ाकू विमान सेमी स्टील्थ फीचर्स से युक्त हैं. ये दुश्मन के रडार को चकमा देने में भी माहिर हैं. मिटियोर, स्कैल्प, हैमर एवं अन्य मिसाइलों से लैस हो जाने के बाद ये फाइटर जेट्स काफी घातक साबित होने लगते हैं. राफेल में अपने बचाव की आधुनिक तकनीक लगी है जो इसे बेहद खास बना देती है. यह लड़ाकी विमान अपने भार से डेढ़ गुना वजन लेकर उड़ान भर सकता है और जरूरत पड़ने पर यह परमाणु हथियार भी ले जा सकता है.

राफेल के आ जाने के बाद चीन और पाकिस्तान की वायु सेना के लिए चुनौती पहले से ज्यादा बढ़ गई है. चीन अपने लड़ाकू विमान चेंग्दू जे-20 को पांचवीं पीढ़ी का विमान बताता है लेकिन रक्षा विशेषज्ञ चीन के दावों पर संदेह जताते हैं. बताया जाता है कि जे-20 में पुराना इंजन लगा है और इस लड़ाकू विमान के पास युद्ध अभियान में शामिल होने का कोई अनुभव नहीं है. जबकि राफेल अफगानिस्तान, सीरिया और लीबिया के युद्ध अभियानों में शामिल होकर अपनी काबिलियत साबित कर चुका है. पाकिस्तान का एफ-16 लड़ाकू विमान भी राफेल के आगे नहीं टिकता है. बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारत के मिग-21 बॉइसोन ने एफ-16 को मार गिराया था.