राहुल गांधी के वो युवा साथी, बिछड़े सभी बारी-बारी

राजस्थान में सचिन पायलट की बगावत के बाद कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा हो गई हैं. पायलट ने साफ कर दिया है कि गहलोत सरकार अल्पमत में है और उन्होंने कांग्रेस के सामने किसी भी तरह की शर्त नहीं रखी है. यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस में इस तरह से युवा नेता पार्टी छोड़ रहे हैं या फिर उन्हें दरकिनार किया जा रहा है. कांग्रेस में ऐसे कई उदाहरण सामने आ चुके हैं जहां युवा की बजाय पुराने और अनुभवी नेताओं को तरजीह दी गई.

कभी राहुल की सबसे खास रहने वाले नेता आज या तो पार्टी से बाहर हैं या फिर दरकिनार हैं. तो आइए जानने की कोशिश करते हैं कि कौन-कौन से युवा नेता ऐसे रहे जिनकी अनदेखी की गई और जिन्होंने फिर अपना रास्ता अलग चुना या फिर एक तरह से कोपभवन में चले गए.


ज्योतिरादित्य सिंधिया- सबसे पहला नाम इस लिस्ट में किसी का आता है तो वो हैं मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता और महाराज के नाम से मशहूर ज्योतिरादित्य सिंधिया का. इसी साल मार्च में उन्होंने पार्टी से ऐसी बगावत की थी कि कांग्रेस को मध्य प्रदेश में सत्ता से हाथ धोना पड़ा. दरअसल जब राज्य में चुनाव हुए तो तभी से उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार या प्रदेश कांग्रेस का दावेदार माना जा रहा था लेकिन बाजी लगी कमलनाथ के हाथ. इसके बाद कई मौकों पर दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से खटास देखी गई और अनंत: सिंधिंया ने पार्टी को अलविदा कह दिया. इसके बाद सिंधिया बीजेपी में आ गए.

अजॉय कुमार- झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने पिछले साल ही कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी ज्वॉइन की थी. अजॉय कुमार एक समय कांग्रेस के शानदार प्रवक्ताओं में गिना जाता था और वो राहुल गांधी के करीबियों में शुमार थे. लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. अजॉय कुमार के इस्तीफे के पीछे की वजह भी पुराने कांग्रेसी नेता सुबोधकांत सहाय बताई जाती है. झारखंड में भले ही अजॉय अध्यक्ष रहे लेकिन सुबोधकांत सहाय ने उन्हें कभी समर्थन नहीं दिया. इसकी वजह से पार्टी में दो गुट हो गए थे.

अल्पेश ठाकोर- गुजरात में कांग्रेस का युवा चेहरा माने जाने वाले अल्पेश ठाकुर ने पिछले साल जुलाई में ही विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था. दरअसल ठाकोर को गुजरात में लगातार नजरंदाज किया जा रहा था जिसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बना लिया. उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ बीजेपी ज्वॉइन कर ली थी. अल्पेश ने उसके बाद बीजेपी के टिकट पर विधानसभा का उपचुनाव भी लड़ा था लेकिन हार गए.

प्रद्युत किशोर देबबर्मन-
त्रिपुरा में कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शुमार युवा और त्रिपुरा कांग्रेस के उपाध्यक्ष प्रद्युत किशोर देबबर्मन ने पिछले साल सितंबर में पार्टी को अलविदा कह दिया था. प्रद्युत किशोर देबबर्मन ने तब पार्टी से इस्तीफा देते हुए कहा था कि पार्टी आलाकमान ने एनआरसी पर उनके विचार को लेकर पार्टी के एक वर्ग से समझौता करने के लिये कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. प्रद्युत को पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में कांग्रेस का युवा चेहरा माना जाता था.

इसके अलावा राहुल की टीम के कई युवा नेता ऐसे हैं जो आज पार्टी में तो हैं लेकिन उनकी भागीदारी बहुत कम हो गई है. जिनमें मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम, पंजाब के पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर और राहुल तथा प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू शामिल हैं. यहीं नहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद हों या मिलिंद देवड़ा, ये भी अब काफी कम सक्रिय नजर आते हैं.