विकास दुबे की कहानी तो खत्म हुई अब भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के नकाब भी हटाए योगी सरकार

पिछले 7 दिन से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बढ़ते अपराधियों को लेकर काफी आक्रमक मूड में थे . शुक्रवार सुबह विकास दुबे का एनकाउंटर करने के बाद इस कहानी का खात्मा तो हो गया है. लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी को एक और पहल करनी चाहिए. योगी प्रदेश में एक अभियान चलाएं और उसमें ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान करें जो अपराधों में लिप्त हैं. इसमें वर्दी की आड़ में बड़े-बड़े अपराधी छुपे बैठे हुए हैं. पुलिस पर मिलीभगत होने के हम ज्यादा पीछे नहीं जाते हैं . शुरुआत ‌वहीं से करते हैं जब कुख्यात अपराधी विकास दुबे ने 2 जुलाई की रात आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की थी.

उसके बाद विकास दुबे पर पुलिस कर्मियों के साथ मिलीभगत के कई सबूत मिले थे . इसके बाद पुलिसकर्मियों पर भी सवाल उठे थे लेकिन यह मामला आगे बढ़ नहीं पाया . योगी सरकार को प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के साथ यह भी याद रखना होगा कि इसमें पुलिस की भी भूमिका साफ सुथरी होनी चाहिए . जब तक उत्तर प्रदेश पुलिस मिलीभगत और भ्रष्टाचार में लिप्त रहेगी तब तक योगी अपने इरादे में सफल नहीं हो सकते हैं. कानपुर शूटआउट मामले में अब तक की जांच में पुलिस अफसरों की मिलीभगत साफ नजर आई थी. हालांकि पुलिस ने चौबेपुर थाना प्रभारी रहे विनय तिवारी और एसआई केके शर्मा को गिरफ्तार कर लिया. दोनों पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस दबिश की जानकारी विकास को लीक की और शूटआउट के वक्त भाग गए थे .

डीएसपी देवेंद्र मिश्रा की हत्या में कानपुर पुलिस दो खेमों में बंटी हुई थी
हम आपको बता दें कि कानपुर शूटआउट में मारे गए सीओ देवेंद्र मिश्रा की चिट्ठी और वायरल हुए ऑडियो से साफ है कि कानपुर की पुलिस खेमों में बंटी हुई थी. इस मामले की तह में जाने पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आई थी. लेकिन कानपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश के आला अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. सबसे बड़ा कारण यह है कि कोई पुलिस अधिकारी अगर खुल कर बोल दिया तो कई बेनकाब होंगे. दिवंगत डीएसपी देवेन मिश्रा ने दरोगा विनय तिवारी की विकास दुबे के साथ मिलीभगत की बात कानपुर के एसएसपी रहे अनंत देव को बताई थी लेकिन अनंत देव ने इस मामले को पूरी तरह दबा दिया था.

इन्हीं सब बातों के चलते कानपुर के तत्कालीन एसएसपी पर भी सवाल उठे थे. यही वजह है कि बतौर एसटीएफ डीआईजी कानपुर शूटआउट की जो जांच वह कर रहे थे, वह उनसे वापस ले ली गई. जांच वापस लेने के साथ उनका तबादला भी डीआईजी स्टाफ से डीआईजी पीएसी, मुरादाबाद कर दिया गया है. विकास दुबे से मिलीभगत के बाद भले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसएसपी अनंत देव का तबादला कर दिया हो लेकिन अब इस से काम चलने वाला नहीं . इसके साथ ही कानपुर के चौबेपुर पुलिस थाने पर विकास दुबे के मिलीभगत होने के सवाल उठे थे .

यूपी के पूर्व डीजीपी ने पुलिस के अपराधियों के साथ मिलीभगत पर उठाए थे सवाल
विकास दुबे और उनके गुर्गों के द्वारा 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी रहे विक्रम सिंह ने यूपी पुलिस की मिलीभगत पर सवाल उठाए थे . पूर्व डीजीपी ने माना था कि आठ पुलिसकर्मियों के शहीद होने के मामले में विकास दुबे के साथ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का भी बड़ा हाथ है. इस घटना के बाद सीधे पुलिसकर्मियों पर गाज गिरनी चाहिए थी लेकिन विकास दुबे का मामला इतना बड़ा हो गया था कि उसकी आड़ में अभी तक पुलिसकर्मियों के चेहरे बेनकाब नहीं हो सके हैं. आपको बता दें कि 2 जुलाई की रात पुलिस के विकास दुबे के घर दबिश देने देने से पहले ही उसको इसकी भनक लग गई थी .

इसमें भी पुलिस के कई अफसरों की प्रमुख भूमिका रही है . यही वजह है कि उसने पुलिस के पहुंचने से पहले ही रास्ता ब्लॉक करने के लिए जेसीबी मशीन लगा दी थी. पुलिस टीम पर हमला करने के लिए इसने हथियार और कारतूस के साथ अपने लोगों को पहले ही एकत्र कर लिया था. अगर इस मामले में पुलिस इमानदारी से पेश आती है तो शायद पुलिसकर्मियों की जान बच सकती थी. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस की छवि सुधारने के लिए बातें बहुत बड़ी-बड़ी की जाती है लेकिन उसको अमल में लाया नहीं जाता है. अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास सही मौका है अपराधियों के साथ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की भी जांच कराकर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए .‌


शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार