राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे ओली, प्रचंड के साथ स्टैंडिंग कमेटी के 45 में से 30 सदस्य

नेपाल का राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली राष्ट्रपति बिद्यया देवी भंडारी से मिलने के लिए पहुंचे हैं. हालांकि ये स्पष्ट है कि मुलाकात इस्तीफ़ा सौंपने के लिए है या फिर ओली कोई और बड़ी राजनीतिक चाल चलने की तैयारी में हैं. उधर ओली ने एक बार फिर गुरूवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है.

इस बैठक में किसी असंवैधानिक फैसले कि आशंका से पूर्व पीएम पुष्प दहल प्रचंड ने अपने करीबी मंत्रियों को बैठक छोड़कर निकलने का आदेश दिया है. खबर है कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी के 45 में से 30 सदस्य चाहते हैं चाहते हैं कि ओली प्रधानमंत्री पड़ से इस्तीफा दे दें.

मिली खबर के मुताबिक ओली ने मंगलवार देर रात चीनी राजदूत से भी मुलाक़ात कर मदद मांगी थी लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी है. ऐसी ख़बरें हैं कि पार्टी को टूटने से बचने के लिए अब ओली को जल्द इस्तीफा देना पड़ सकता है. अगर ओली प्रधानमंत्री ‌पद से इस्तीफा नहीं देते तो दबाव बनाने के लिए माओवादी खेमे के मंत्री इस्तीफा भी दे सकते हैं. उधर ओली पार्टी की स्थाई समिति की इस्तीफे की मांग न मानकर संसदीय दल में बहुमत जुटाने का विकल्प चुन सकते हैं.

प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर सत्तारूढ़ पार्टी की स्थायी समिति की बैठक शुरू होते हुए ही प्रचंड ने रविवार को प्रधानमंत्री द्वारा की गयी टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की थी. पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कहा है कि भारत के संदर्भ में प्रधानमंत्री की टिप्पणी न तो राजनीतिक तौर पर ठीक थी न ही कूटनीतिक तौर पर यह उचित थी. प्रचंड ने कहा- ‘भारत उन्हें हटाने का षड्यंत्र कर रहा है, प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी न राजनीतिक तौर पर बेहद अपरिपक्व थी.’

बुधवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद केपी शर्मा ओली को काठमांडू के शहीद गंगालाल नेशनल हार्ट सेंटर में भर्ती कराया गया था. उनके प्रेस सलाहकार सूर्या थापा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होना उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच का एक हिस्सा था. मार्च के अंत में ओली की हृदय गति बढ़ने पर उन्हें त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. बता दें कि इस साल मार्च में ही ओली ने अपने गुर्दे का प्रत्यारोपण करवाया था.

ऐसा माना जा रहा था कि चीन के उकसावे के चलते ही ओली लगातार भारत विरोधी रुख अख्तियार किये हुए थे. हालांकि ऐसी ख़बरें हैं कि ओली के मुश्किल वक़्त में चीन ने भी उनका साथ छोड़ दिया है. जानकारी के मुताबिक चीनी राजदूत को भी प्रधानमंत्री निवास पर हुई बैठक में बुलाया गया था. सूत्रों के मुताबिक चीनी राजदूत ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं. अब पार्टी को टूटने से बचने के लिए ओली का इस्तीफा ही एकमात्र विकल्प बचा है.

एक वरिष्ठ नेता ने प्रचंड के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा पड़ोसी देश और अपनी ही पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाना ठीक बात नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रचंड के अलावा, वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल, झालानाथ खनल, उपाध्यक्ष बमदेव गौतम और प्रवक्ता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने प्रधानमंत्री को अपने आरोपों को लेकर सबूत देने नहीं तो त्यागपत्र देने के लिए कहा है.