खास रिपोर्ट – नए दौर में सिनेमा के रिलीज होने का बदल रहा है ट्रेंड

आइए आज आपको बॉलीवुड लिए चलते हैं . फिल्मनगरी का नाम आते ही सिनेमा की चकाचौंध की याद आ जाती है . लेकिन कोरोना महामारी के आगे फिल्म इंडस्ट्रीज भी ठहरी हुई है . निर्माता, निर्देशक अभिनेता-अभिनेत्री ऐसे ही इस इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोग पिछले तीन महीनों से घरों में बैठे हुए हैं . फिल्मों की शूटिंग और देशभर के सिनेमाघरों के बंद होने से फिल्मलाइन से जुड़े तमाम लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है. अब कुछ दिनों से बॉलीवुड ने भी देशभर में सिनेमा को गति देने के लिए एक नया तरीका निकाल लिया है . जी हां हम बात कर रहे हैं ‘डिजिटल’ की . मौजूदा समय में हमारे देश और दुनिया भर में कोरोना महामारी  ‘पीक’ पर आ गई है . ऐसे में सिनेमा हाल और सिनेमल्टीप्लेक्स कब खुलेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता है . अब फिल्म निर्माता-निर्देशकों ने अपनी फिल्मों को सिनेमाघरों के बजाय ‘डिजिटल प्लेटफॉर्म’ पर रिलीज करने का फैसला किया है . आपको बता दें कि पिछले दिनों अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी. इस फिल्म को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काफी अच्छी ओपनिंग मिली है . इससे उत्साहित बॉलीवुड इस डिजिटल की ओर तेजी के साथ आकर्षित हो रहा है . अब फिल्म इंडस्ट्रीज भी बहुत दिनों तक एक ही ढर्रे पर खड़ा होना नहीं चाहती है, वह भी फटाफट सिनेमा में मुनाफा तलाशने में जुट गई है . निर्माता-निर्देशकों के लिए अब डिजिटल प्लेटफार्म कम समय में जल्द मुनाफा कमाने का सबसे अच्छा जरिया खूब पसंद आने लगा है . 

सिनेमाघरों की अपेक्षा डिजिटल प्लेटफॉर्म ज्यादा है मुनाफे का सौदा—

गुलाबो सिताबो के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के बाद अब फिल्मों की रिलीज को लेकर नया ट्रेंड तेजी के साथ बढ़ रहा है . फिल्म डायरेक्टर भी आने वाले दिनों में इस डिजिटल के क्षेत्र में ही अपना मुनाफे का सौदा तलाश रहेे हैं . आने वाले महीनों में छह से ज्यादा फिल्में ओटीटी प्लेटफाॅर्म पर रिलीज होने जा रही हैं, जिनमें विद्या बालन की ‘शकुंतला देवी’ और जान्हवी कपूर की ‘गुंजन सक्सेना- द करगिल गर्ल’ शामिल हैं. डिजिटल प्लेटफार्म पर गुलाबो सिताबो को मिली भारी सफलता से निर्माता उत्साहित नजर आ रहे हैं . फिल्म के जानकारों का कहना है कि ‘गुलाबो सिताबो’ की मेकिंग काॅस्ट 30 करोड़ रुपए की है. इसे अमेजन ने 60 करोड़ रुपए में खरीदा है. यानी दोगुना दाम दिया था . डिजिटल के अलावा सैटेलाइट पर सोनी के साथ फिल्म की डील 20 करोड़ रुपए में हुई है. यहां हम आपको बता दें कि अगर यह फिल्म गुलाबो सिताबो देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होती तो यहीं तक सीमित रहती . डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने से विश्व के कई देशों में इसको दर्शकों ने देखा है . साथ ही गुलाबो सिताबो विश्वस्तरीय फिल्म भी बन गई . डिजिटल प्लेटफॉर्म की कमाई सब्सक्रिप्शन पर आधारित होती है. इसके तहत अमेजन, नेटफ्लिक्स या अन्य के प्लेटफाॅर्म पर जितने भी कंटेंट मौजूद हैं, उन सब को दर्शक देखते हैं.

देश और दुनिया में आज लगभग हरे क्षेत्र व्यापारिक संस्था बन चुके हैं . ऐसे में हर संस्थान और उद्योग अपना मुनाफा तलाशने लगा है. फिल्मनगरी भी अपने सिनेमा के रिलीज को लेकर बदलाव के मोड़ पर आ खड़ी हुई है . गुलाबो सिताबो के निर्माता रॉनी लाहिड़ी खुद कहते हैं कि ‘सिनेमाघर के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेढ़ गुना ज्यादा पैसे मिलते हैं. उसकी कैलकुलेशन फिल्म की लागत नहीं, बल्कि स्टार वैल्यू से होती है. अमिताभ और आयुष्मान की जो फेस और ब्रांड वैल्यू है, उससे हमें डेढ़ गुना ज्यादा रकम मिली है. यही नहीं आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मनोरंजन समेत सभी क्षेत्रों में जितने ज्यादा रास्ते खुलेंगे, उसमें काम करने वाले लोगों के लिए काम मिलना उतना आसान हो जाएगा. सिर्फ हमारे देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म का बहुत तेजी से प्रसार हो रहा है . इसके आने से सभी कलाकारों में एक नई एनर्जी आ गई है, जो मनोरंजन उद्योग के लिए बहुत अच्छी चीज है. भविष्य में सिनेमा, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म में कॉम्पटीशन होने के बजाय सभी प्लेटफॉर्म एक मिलकर एक-दूसरे के विकास में सहयोग करेंगे. इससे दर्शकों को नए और अच्छे कंटेंट मिलने के साथ कलाकारों को ढेर सारे काम भी मिलेंगे.

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार