बड़ी खबर: फिर भारत के समर्थन में उतरा अमेरिका, चीन को दी चेतावनी- धौंस जमाना छोड़ दें

वाशिंगटन|….चीन ने सोमवार को भारत को धमकी देते हुए कहा था कि वह अगर चीन-अमेरिका विवाद में ट्रंप सरकार का साथ देता है तो ये उसकी अर्थव्यवस्था के लिए काफी बुरा साबित हो सकता है.

चीन की इस धमकी का जवाब अमेरिका ने दिया है और कहा है कि अब उसे दुनिया के अन्य देशों पर ‘धौंस’ ज़माने की अपनी रणनीति को छोड़ देना चाहिए. अमेरिका के एक सीनियर कांग्रेसमैन और विदेशी मामलों के पैनल के हेड इलियट एल एंजेल ने कहा है कि अब चीन को पड़ोसी देशों की इज्जत करना सीख लेना चाहिए.

इलियट ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय भी भारत-चीन समा पर जारी टेंशन को लेकर चिंतित है. उन्होंने कहा कि चीन का व्यवहार धौंस जमाने वाला है और हम इससे अपेक्षा करते हैं कि वो अपनी इन हरकतों को छोड़कर पड़ोसी देशों के साथ मुद्दे ‘डिप्लोमेसी’ के जरिए हल करने पर जोर दे.

इलियट ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं ऐसे में भारत-चीन सीमा पर तनाव का माहौल पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने सलाह दी कि चीन को अंतरराष्ट्रीय सीमा कानूनों का पालन करना चाहिए और अगर कोई समस्या या विवाद भी है तो इन्हीं के तहत उसे सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए.

बता दें कि इलियट अमेरिका के काफी प्रभावशाली डेमोक्रेट वरिष्ठ संसद सदस्यों में से एक हैं. इलियट ने कश्मीर मुद्दे पर कहा कि अमेरिका की स्थिति एकदम स्पष्ट रही है ये भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है और उन्हें ही इसे बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए. अमेरिका की भूमिका इसमें सिर्फ बातचीत के लिए दोस्ताना माहौल तैयार करने की हो सकती है. हालांकि इलियट ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को उसकी धरती पर चल रहे आतंकी कैंप के बारे में सख्त कदम उठाने चाहिए, इसी के बाद कश्मीर पर कोई बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है.

इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने आरोप लगाया है कि चीन जमीनी स्तर पर अपनी ‘रणनीतिक स्थिति’ का अपने लाभ के लिए उपयोग कर रहा है और दूसरों के लिए खतरा पैदा कर रहा है. भारत के साथ लगी अपनी सीमा पर भी वह लंबे समय से इसी तरह की हरकत कर रहा है. चीन-भारत सीमा पर और दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के आक्रामक रवैये के संबंध में ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ साक्षात्कार में एक सवाल पर पोम्पिओ ने कहा कि चीन की तरफ से पैदा किया जा रहा खतरा वास्तविक है.

उन्होंने कहा ,’इस दिशा में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी लंबे समय से प्रयास कर रही है. निश्चित तौर पर जमीन पर उनको रणनीतिक स्थिति का फायदा होता है. लेकिन, आप किसी भी समस्या को चिन्हित करें तो लंबे समय से उस दिशा में वे काम कर रहे हैं.’ पोम्पिओ ने कहा कि खतरा देखें तो भारत के साथ लगी सीमा पर जो हो रहा है उसके लिए वे लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं.

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा सेना को आगे करने के संबंध में उन्होंने कहा कि खतरा वास्तविक है. उन्होंने कहा, ‘चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी सेना की क्षमता बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हमारा रक्षा विभाग भी मानता है कि यह खतरा वास्तविक है.’

पोम्पिओ ने कहा, ‘मैं आश्वस्त हूं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में हमारा रक्षा विभाग, हमारी सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा के हमारे प्रतिष्ठान हमें उस स्थिति में बनाए रखेंगे जहां हम अमेरिकी लोगों की रक्षा कर सकते हैं. भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राजील और यूरोप समेत दुनियाभर में हमारे सहयोगियों के साथ हमारी अच्छी भागीदारी है.’ उन्होंने कहा कि आज की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी दस साल पहले की पार्टी से अलग है. पोम्पिओ ने कहा, ‘सूची बहुत लंबी है. चाहे अमेरिका के बौद्धिक संपदा अधिकार को चुराने का मामला हो, अमेरिका में लाखों लोगों की नौकरी बर्बाद करने का मुद्दा हो, दक्षिण चीन सागर में समुद्री मार्ग में खतरा पैदा करने का हो, चीन ऐसे कई कदम उठा रहा है. साथ ही, जिन स्थानों पर सेना की तैनाती का अधिकार नहीं है वहां भी चीन उनकी तैनाती कर रहा है.’