नेपाल रॉयल हत्याकांड: क्या ‘प्यार बनाम शाही शान’ का प्लॉट था वजह

राजकुमार जिस लड़की से प्यार करता था, वह शाही घराने के काबिल नहीं थी! क्या आधुनिक समय के ऐतिहासिक नरसंहार के पीछे यह प्लॉट आपको आकर्षिक करता है? या नेपाल राजघराने के खात्मे के पीछे पड़ोसी देश की इंटेलिजेंस एजेंसियों का हाथ था? या फिर राजघराने या सरकार के भीतर कोई गहरी साज़िश पनप रही थी? प्रिंस दीपेंद्र की कहानी समेत जानिए कि इस रॉयल फैमिली हत्याकांड के पीछे का सच क्या था.

पहली थ्योरी : राजपरिवार की कलह
प्रिंस दीपेंद्र को मां यानी नेपाल की रानी ऐश्वर्या ने शादी के बारे में बात करने के लिए बुलाया. रानी ऐश्वर्या ने कहा कि वह प्रिंस की शादी के लिए वह दुल्हन का चुनाव कर रही थीं. इस पर प्रिंस दीपेंद्र ने कहा कि वह अपनी मर्ज़ी की लड़की से शादी करना चाहता था, तो एक पल के लिए ऐश्वर्या का माथा ठनका. ऐश्वर्या ने उस लड़की के बारे में जब पूछा तो प्रिंस के जवाब से नाराज़ होकर साफ शब्दों में इस शादी से इनकार करते हुए चली गईं.

प्रिंस को आभास तो था कि उनकी मर्ज़ी पर ऐतराज़ होगा लेकिन इतना सख़्त होगा, यह उम्मीद नहीं थी. प्रिंस ने अपनी मां को मनाने का निश्चय किया. एक दिन फिर प्रिंस मां के पास पहुंचा और शादी के बारे में बात करना चाही तो ऐश्वर्या ने फिर इनकार करते हुए कहा कि उसके लिए दुल्हन उन्होंने चुन ली थी. इस बार प्रिंस दीपेंद्र नाराज़ हो गया और यह बोलकर वहां से चला गया कि वह शादी करेगा तो देवयानी से ही.

माता-पिता दोनों से हाथ लगी मायूसी
मां-बेटे के बीच इस बात को लेकर जैसे एक जंग छिड़ चुकी थी. कुछ वक्त के बाद ऐश्वर्या ने कहा कि उन्होंने जो लड़की प्रिंस के लिए चुनी, वह राजमाता रत्ना की बहन के खानदान की थी यानी राजघराने की. राजघराने में अगर दुल्हन आएगी तो प्रतिष्ठित राजघराने से ही. दीपेंद्र ने कहा कि देवयानी भी राजघराने की थी, तो ऐश्वर्या बिगड़ गईं और कहा कि उनके घराने की आन बान शान में वह लड़की फिट नहीं होती.

न कुंडलियां मिलीं और न रानी का मन बदला
एक दिन दीपेंद्र अपनी और देवयानी की कुंडलियां लेकर ऐश्वर्या के पास गया और बोला कि शादी करेगा तो देवयानी से ही, भले ही माता-पिता की इच्छा हो या नहीं. ऐश्वर्या ने दोनों की कुंडलियों का मिलान करवाया तो एक ज्योतिषी का कहना था कि अगर प्रिंस दीपेंद्र 35 साल की उम्र से पहले पिता बनेंगे तो महाराज की मृत्यु तक हो सकती थी.

दीपेंद्र और देवयानी का रिश्ता कायम था. दीपेंद्र ने भरोसा दिला रखा था कि शादी उसी से करेगा. फिर एक दिन ऐश्वर्या ने साफ कह दिया कि देवयानी जिस सिंधिया खानदान से है, वो पुणे के पेशवाओं की नौकरी करते थे इसलिए वो शाही खानदान के मुकाबले कुछ नहीं हैं. दीपेंद्र ने कहा कि प्रिंस निरंजन की शादी तय करते वक्त तो यह नहीं सोचा गया. ऐश्वर्या बिगड़ गईं और दीपेंद्र को तमीज़ से बात करने के लिए कहा.

इसी ज़िद के दौरान फैमिली डिनर
ऐश्वर्या और प्रिंस दीपेंद्र दोनों अपनी ज़िद पर अड़े रहे. इसी बीच, दीपेंद्र का राजनीतिक दखल और उसके पिता के फैसले भी एक-दूसरे के उलट ही साबित हो रहे थे. साल 2001 में जून के महीने का पहला दिन था. दीपेंद्र हर तरफ से मायूस था और जल्द ही कोई फैसला चाहता था. इसी दिन राजमहल में फैमिली डिनर का आयोजन था. मौका था सबके सामने किसी नतीजे पर पहुंचने का. लेकिन नतीजा निकला कुछ और ही.

दीपेंद्र ने शाम से ही नशा करना शुरू कर दिया था और बेकाबू हो गया था. सबकी मौजूदगी में मां और पिता पर चीखा-चिल्लाया तो कुछ रिश्तेदार उसे कमरे में छोड़ आए. अपने कमरे में पहुंचने के बाद दीपेंद्र ने देवयानी से फोन पर बात की तो बस यही कहा कि अब वह सोने जा रहा था.


इधर, दीपेंद्र और देवयानी दोनों को उम्मीद थी कि शादी की संभावना खत्म नहीं हुई. इस बीच, दीपेंद्र ने अपने देश नेपाल के सुरक्षा विभाग के लिए हथियारों और अन्य उपकरणों की एक डील का प्रस्ताव रखा और अपना सुझाव भी. दीपेंद्र के इस प्रस्ताव को दीपेंद्र के पिता और नेपाल के राजा बीरेंद्र ने दरकिनार करते हुए इससे उलट अपने फैसले को तरजीह दी. दीपेंद्र को यहां भी मायूसी हाथ लगी.

फिर चलीं धड़ाधड़ गोलियां…
इसके बाद दीपेंद्र कमरे से निकला तो आर्मी के जवान की तरह और घातक हथियारों से लैस होकर. फिर गैदरिंग हॉल में पहुंचकर धड़ाधड़ गोलियां बरसाते हुए दीपेंद्र ने अपने माता-पिता समेत राजपरिवार के नौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया और खुद को भी गोली मार ली.

थ्योरी 2 : राजमहल में हुए नरसंहार के 8 साल बाद यानी 2009 में तुल बहादुर शेरचन सामने आया और उसने कहा कि उस हत्याकांड का ज़िम्मेदार वह था. एक रिपोर्टर के साथ मुलाकात में नाटकीय और संदेहास्पद ढंग से शेरचन ने यह खुलासा किया था.

थ्योरी 3 : हत्याकांड के समय के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री रहे चक्र बासटोला का कहना था कि हत्याकांड के पीछे पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला को भी मारने की साज़िश थी. चक्र के मुताबिक कोईराला की कार पर हमला हुआ था. चक्र ने इसे एक बड़ी साज़िश करार दिया था.

थ्योरी 4 : पेशे से पत्रकार रहे कृष्णा अबिरल ने रक्तकुंड उपन्यास लिखा. कृष्णा ने राजमहल की एक महिला कर्मचारी के साथ इंटरव्यू किए जो रानी की सेविका थी. इस उपन्यास में लिखा गया कि दीपेंद्र के भेस में दो नकाबपोश आदमियों ने गोलियां बरसाईं. ये दो नकाबपोश कौन थे? यह रहस्य अब तक सुलझा नहीं है.

थ्योरी 5 : नेपाल के तत्कालीन राजा बीरेंद्र के छोटे भाई ज्ञानेंद्र उस रात महल में मौजूद नहीं थे. हत्याकांड में बीरेंद्र की तरफ के रिश्तेदार मारे गए लेकिन ज्ञानेंद्र की तरफ के रिश्तेदार बच गए. इसके बाद आरोप लगाया गया कि ज्ञानेंद्र राजा बनना चाहते थे और गद्दी हथियाने के लिए हो सकता है कि षडयंत्र उन्होंने ही रचा हो.

थ्योरी 6 : नेपाल नरेश बीरेंद्र की हत्या के नौ साल बाद नेपाल के पूर्व पैलेस मिलिट्री सेक्रेट्री जनरल बिबेक शाह ने एक किताब लिखी ‘माइले देखेको दरबार’ (राजमहल, जैसा मैंने देखा) और दावा किया कि निर्मम हत्याकांड के पीछे संभवतः भारत का हाथ था. शाह के अलावा नेपाली नेता पुष्प कमल दहाल ने भी दावा किया था कि इस हत्याकांड की साज़िश रॉ ने रची.

थ्योरी 7 : नारायणहिति राजमहल के परिसर में खतरनाक हथियारों से लैस सुरक्षा गार्ड बड़ी संख्या में मौजूद रहते थे. थ्योरी रही कि उनमें से कोई हत्याकांड के पीछे हो सकता था. इसके अलावा डॉक्टरों पर शक किया गया. सिर में गोली लगने के बाद प्रिंस दीपेंद्र 1 जून 2001 की रात से अस्पताल में तीन दिन कोमा में रहा. 3 दिन बाद मौत हुई लेकिन पोस्टमार्टम नहीं किया गया.

थ्योरी 8 : शाही परिवार की हत्या के वक्त नेपाल राजपरिवार के प्रिंस पारस की भूमिका पर उंगली उठी थी. जब हादसा हुआ राजकुमार पारस शाही महल में मौजूद था लेकिन उसे खरोंच तक नहीं आई. पहले भी कई मामलों में बदनाम पारस के मिज़ाज, करतूतों और अतीत को देखकर पारस पर शक किया गया.

इनके अलावा एक और थ्योरी कुछ वक्त के लिए चर्चा में रही थी, सेल्फ बॉम्बिंग. कहा गया था कि इस हत्याकांड के पीछे मानव बम का धमाका हो सकता था. इन तमाम थ्योरीज़ के चलते सच का खुलासा नहीं हुआ. अलबत्ता कुछ सवाल ज़रूर खड़े होते रहे जैसे इस घटना के बाद भारत ने यह बयान क्यों दिया कि इस घटना में भारत की कोई साज़िश नहीं है? पूरी घटना के दौरान राजमहल के एडीसी अपने कमरे से बाहर क्यों नहीं निकले? नेपाल के राजमहल के सुरक्षाकर्मी गोलियां चलने की आवाज़ों के बावजूद वहां क्यों नहीं पहुंचे? और तमाम थ्योरीज़ पर क्या जांच हुई, क्या नतीजे निकले?

साभार-न्यूज़ 18