बड़ी खबर: स्वदेशी तेजस की दूसरी स्क्वाड्रन आईएएफ में शामिल, एयर चीफ मार्शल ने कोयंबटूर में भरी उड़ान

बुधवार को स्वदेशी विमान तेजस की दूसरी स्क्वाड्रन वायुसेना में शामिल हो गई. इस स्क्वाड्रन का नाम फ्लाइंग बुलेट्स दिया गया है. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित एयर फोर्स स्टेशन सुलुर में तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरी.

इसके साथ ही भारतीय वायुसेना ने सुलूर में चौथी पीढ़ी के एमके1 एलसीए (हल्का लड़ाकू विमान) तेजस से लैस अपनी 18 वीं स्क्वाड्रन का संचालन शुरू कर दिया है. वायुसेना ने हल्के लड़ाकू विमान तेजस को HAL से खरीदा है. नवंबर 2016 में वायुसेना ने 50,025 करोड़ रुपये में 83 तेजस मार्क-1 ए की खरीदी को मंजूरी दी थी. इस डील पर अंतिम समझौता करीब 40 हजार करोड़ रुपये में हुआ है. यानी पिछली कीमत से करीब 10 हजार करो़ड़ रुपये कम खर्च हुए थे.

तेजस चौथी पीढ़ी का एक स्वदेशी टेललेस कंपाउंड डेल्टा विंग विमान है. यह फ्लाई-बाय-वायर विमान नियंत्रण प्रणाली, इंटीग्रेटेड डिजिटल एवियोनिक्स, मल्टीमॉड रडार से लैस है. इसकी संरचना कंपोजिट मैटेरियल से बनी है.

एक रक्षा विज्ञप्ति में सोमवार को बताया गया कि यह चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक लड़ाकू विमान के समूह में ‘सबसे हल्का और छोटा’विमान भी है. ‘तीव्र और निर्भय’के उद्देश्य के साथ 1965 में गठित 18वीं स्क्वाड्रन पहले मिग 27 विमान उड़ाती थी. इस स्क्वाड्रन ने पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया था.


बता दें कि स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही वायुसेना को इसी साल 36 रफाल लड़ाकू विमानों की पहली खेप फ्रांस से मिलने जा रही है. ऐसे में तेजस की एक नई स्क्वाड्रन का शामिल होना राहत भरी खबर है.