बड़ी खबर: उत्तराखंड में क्‍वारंटाइन सेंटर्स को लेकर सियासत, कांग्रेस ने लगाया लापरवाही का आरोप, बीजेपी नेता ने किया ये ट्वीट

प्रवासियों के वापसी के साथ ही अब क्वारेंटाइन सेंटर्स में अव्यवस्थाओं का मुददा गरमाने लगा है. कांग्रेस लगातार सरकार पर नाकामियों का आरोप मढ़ रही है, तो सत्ताधारी दल के ही विधायक चंदनराम दास के एक ट्वीट ने आग में घी का काम कर दिया. दरअसल, उत्तराखंड में प्रवासियों के आगमन के लिए स्कूल कॉलेज, होटल, पंचायत भवनों को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है, लेकिन जैसे-जैसे प्रवासियों की आमद बढ़ रही है व्यवस्था पटरी से उतरती चली जा रही है. अभी तक करीब एक लाख साठ हजार प्रवासी उत्तराखंड लौट चुके हैं. घर लौटने से पहले इन प्रवासियों को उनके जिलों और गांव में क्वारेंटाइन किया जा रहा है, लेकिन क्वारेंटाइन सेंटरों में साफ-सफाई से लेकर खाने-पीने और रहने की उचित व्यवस्था न होने की शिकायतें आ रही हैं.

पौड़ी में तीन और पिथौरागढ़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई है. जबकि ऊधमसिंह नगर में क्वारेंटाइन सेंटर में एक पुलिसकर्मी द्वारा महिला के साथ रेप के प्रयास की घटना ने तो सबको सन्न करके रख दिया. वहीं. इसके अगले ही दिन बेतालघाट में क्वारेंटाइन सेंटर में सांप के काटने से एक बच्ची की मौत हो गई.

कांग्रेस इन सबके लिए सरकार की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रही है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है सरकार विपक्ष के सुझाव लेने तक को तैयार नहीं है. पहाड़ों में क्वारेंटाइन सेंटरों में व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं. सरकार इनको बेस कैंप अर्थात एंट्री पॉइंट पर रोके और क्वारेंटाइन करने के बाद घर भेजे.

विधायक चंदन रामदास का ट्वीट

इससे पहले की बीजेपी सरकार या संगठन इस पर कुछ माकूल जवाब दे पाता, पार्टी के बागेश्वर से विधायक चंदन रामदास ने भी एक क्वारेंटाइन सेंटर का वीडियो ट्वीट कर व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए. चंदन रामदास ने लिखा है कि जो प्रशासन खाने की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है वो रोजगार की व्यवस्था कैसे कर पाएगा. विधायक के इस ट्वीट से बीजेपी बैकफ़ुट पर है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत इस पर गोलमोल जवाब दे रहे हैं. उनका कहना है कि बड़ी संख्या में प्रवासी लौट रहे हैं थोड़ा बहुत व्यवस्थाओं में कमी रह जाती है. जहां लापरवाही हुई है, उन सेंटरों पर कार्रवाई भी हुई है.

बहरहाल, पूरे प्रदेश में स्कूल, कॉलेज, पंचायत घरों को मिलाकर करीब पंद्रह हजार क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए हैं. लेकिन, क्वारेंटाइन सेंटरों की आधी-अधूरी व्यवस्थाएं कोरोना संकट के बीच लौट रहे लोगों पर भारी साबित हो रही हैं.