नेपाल ने फिर तरेरी आंख, कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए भारतीयों को बताया जिम्मेदार

नेपाल से भारत के संबंध ऐतिहासिक हैं. लेकिन इन दिनों नेपाल की बोली में बड़ा बदलाव आया है. नेपाल ने हाल ही में अपना नक्शा जारी किया और भारत की 389 किमी जमीन को अपना हिस्सा बताया यानि कि जमीन का वो टुकड़ा भारत के कब्जे में है. भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद नेपाल ने अब कोरोना वायरस को मोहरा बनाते हुए एक बार फिर निशाना साधा है.

नेपाल के पीएम के पी शर्मा ओली कहते हैं कि कोरोना की वजह से उनके देश में कम मौतें हुई हैं और यह आंकड़ा दक्षिण एशिया में सबसे कम है. वो आगे कहते हैं कि नेपाल में जो भी मामले बढ़े हैं उसके लिए बिना चेकिंग के भारत से जो लोग आ रहे हैं वो जिम्मेदार हैं, यह सवाल लाजिमी है कि जो भी लोग भारत से नेपाल जा रहे हैं वो कौन हैं, अगर नेपाली नागरिक भारत से जा रहे हैं तो उनके स्वास्थ्य परीक्षण की जिम्मेदारी किसकी है.

अब सवाल यह है कि क्या यह नेपाल की भाषा है या वो चीन के बहकावे पर इस तरह की भाषा बोल रहा है. यहां समझना जरूरी है कि कोविड 19 के खिलाफ लड़ाई में पीएम नरेंद्र मोदी ने सार्क के देशों के साथ बातचीत की उसमें सभी देशों ने भारत के प्रयासों की सराहना की तो आखिर ऐसा क्या हो गया कि नेपाल के सुर में बदलाव हुआ. दरअसल नेपाल की मौजूदा हुकूमत के बारे में कहा जाता है कि वो चीन के प्रति झुका हुआ है.

इसके साथ ही सिर्फ दो महीने पहले दुनिया के दूसरे देशों की तरह पीपीई किट पर भारत की निर्भरता चीन पर थी. लेकिन समय बदलने के साथ आज भारत इस दिशा में आत्मनिर्भर हो चुका है और चीन को यह कामयाबी अखर रही है.