जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल का आरोप, पाक के दबाव में उमर-महबूबा ने पंचायत चुनाव में हिस्सा नहीं लिया

जम्मू-कश्मीर के पूर्व और वर्तमान में गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि जब मैं जम्मू-कश्मीर का गर्वनर था, तो मैंने सभी के लिए राजभवन खोल दिया.

मैंने सभी सलाहकारों को सप्ताह में एक बार लोगों की शिकायतें सुनने का काम सौंपा. मेरे कार्यालय में 95,000 शिकायतें आईं, मैंने उनमें से 93,000 को गोवा आने से पहले हल कर दिया.इसके कारण लोग सहज महसूस करते थे, गुस्सा कम था.

उन्होंने कहा, ‘पीएम ने कहा था कि हम (जम्मू-कश्मीर में) पंचायत चुनाव कराएंगे. मैंने प्रोटोकॉल तोड़ा और उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के आवास पर गया. उन्होंने पाकिस्तान के दबाव में भाग लेने से इनकार कर दिया. आतंकवादियों ने भी धमकी दी कि फिर भी चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.’

मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें विकास पर काम करने का निर्देश दिया. हमने जम्मू-कश्मीर में 1 साल में 52 डिग्री कॉलेज, 8 मेडिकल कॉलेज दिए, 282 जूनियर स्कूल को हायर सेकेंडरी स्कूल किया.

जितने  विकास के काम फंड की कमी की वजह से रूके हुए थे उसके लिए हमने बैंकों से 8,000 करोड़ रुपये उठाया और काम शुरू हो गया 40 वर्षों से लंबित दो बांधों पर काम फिर से शुरू किया गया. वह जल्द ही पूरा हो जाएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान हुर्रियत ने बंद का आह्वान नहीं किया और पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए.

इसके अलावा मलिक ने कहा कि गोवा कोरोना मुक्त है इसलिए घरेलू पर्यटक यहां आएंगे. विदेशी पर्यटकों को लौटने में समय लगेगा लेकिन वे भी आएंगे. यह उद्योग के लिए दीर्घकालिक नुकसान नहीं है. गोवा में कोविड-19 से लड़ने का असली श्रेय हमारे प्रधानमंत्री को जाता है.

गोवा की कामयाबी इसलिए हुई क्योंकि गोवा के मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन और प्रधानमंत्री के सभी आदेशों को लागू किया. जनवरी से ही हमने बाहर से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी.