बड़ी खबर : गरमी में और बढ़ेगा कोरोना वायरस-तापमान और उमस के बीच भी जारी रहेगा संक्रमण

अमेरिका की एक शोध संस्था ने दावा किया है कि भीषण गर्मी और उमस में भी कोरोना वायरस का संक्रमण जारी रहेगा. हालांकि दुनिया में ये माना जा रहा था कि बढ़ती गर्मी के बीच ये वायरस दूसरे वायरसों की तरह निष्क्रिय हो जाएगा. लेकिन नया अध्ययन बताता है कि ऐसा कोरोना वायरस के साथ नहीं होगा.

न्यूजर्सी स्थित प्रिंसटन विश्वविद्यालय में नए शोध में ये दावा किया गया है. इस स्टडी में कहा गया कि उमस या गर्मी के मौसम में भी कोविड-19 यानि कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं रुकेगा. भारत में बढ़ती गर्मी के बाद भी मई महीने में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है.

साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि नियंत्रण उपायों के बिना वायरस अतिसंवेदनशील लोगों की एक विशाल आबादी में आसानी से फैल सकता है. शोध में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के प्रसार को मौसमी और भौगोलिक जलवायु का बदलाव नहीं रोक सकता और ना ही इसे धीमा कर सकता है.

गर्मी में और बढे़गा कोरोना
शोध में कहा गया है कि प्रकोप के उमस या नमी भरे मौसम में कोरोना का संक्रमण और मज़बूत होने की आशंका है. गर्मी का मौसम महामारी को ना तो रोक पाएगा और ना ही इसके प्रसार को सीमित कर पाएगा.

पहला वायरस जिस पर बदलते तापमान का असर नहीं
शोधकर्ताओं के मानना है कि जिस गति से ये महामारी फैल रही है उसमें जलवायु की स्थिति केवल संक्रमण की वर्तमान दर में आंशिक कमी ला सकती है जबकि आमतौर पर किसी भी महामारी के प्रसार और प्रभाव पर जलवायु का प्रभाव होता है. ये शायद दुनिया का पहला और अकेला वायरस है जिस पर बदलता मौसम और बदलते तापमान का कोई असर नहीं नजर आ रहा है.

शोध के लेखक बेकर ने कहा कि ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया सहित दक्षिणी गोलार्ध के अन्य देशों में वायरस का तेज़ी से प्रसार हुआ है जहां गर्मी के मौसम में वायरस शुरू हुआ था. उनका कहना था कि इससे पता चलता है कि गर्म स्थिति महामारी को रोक नहीं सकती है.

रिसर्च का कहना है कि आबोहवा से जुड़े हालात तभी भूमिका निभा सकते हैं जब भविष्य में होने वाली महामारियों को लेकर आबादियों के बड़े हिस्से में पहले से ही इम्युनिटी विकसित हो जाए.

कैसे शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे
रिसचर्स नेतीन अलग-अलग तापमान स्थितियों (सिमुलेशन्स) को तैयार किया. मकसद ये देखना था कि अलग-अलग आबोहवाओं में ये वैश्विक महामारी कैसे व्यवहार करती है. ऐसे ही प्रयोग पहले इंफ्लुएंजा वायरस, ह्यूमन कोरोना वायरस HKU1 आदि के असर और डाटा पर आधारित था.

साभार -न्यूज़ 18