लिपुलेख दर्रा लिंक रोड मामला: भारत से नाराज नेपाल, बॉर्डर पर तैनात की आर्म्ड पुलिस फोर्स

लिपुलेख-धारचुला मार्ग भारत ने तैयार किया है और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले हफ्ते उत्तराखंड में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर चीन की सीमा से लगी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी इस सड़क का उद्घाटन किया था. नेपाल ने सड़क के उद्घाटन पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि ‘एकतरफा कार्रवाई’ सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिये दोनों देशों के बीच बनी सहमति के खिलाफ है.

इस अहम मार्ग के उद्घाटन पर भारत से विरोध जताने के कुछ दिन बाद नेपाल ने अब चांगरु में कालापानी के नजदीक आर्म्ड पुलिस फोर्स का आउटपोस्ट बनाया है. नेपाल का आरोप है कि यह सड़क उसके क्षेत्र से होकर गुजर रहा है, चांगरू गांव भारत से लगती सीमा पर मौजूद है.

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के एक सूत्र के मुताबिक आउटपोस्ट लिपुलेख दर्रे से 18 किलोमीटर दूर बनाया गया है. एक सूत्र ने बताया कि नेपाल के 25 पुलिसकर्मी हेलिकॉप्टर से चांगरु पहुंचे और पोस्ट बनाया. सूत्रों ने कहा, ‘यह पहली बार है जब नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स सीमा पर तैनात की गई है. इससे पहले रेग्युलर पुलिस पोस्ट रहा करती थी.’ उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार ने इस पोस्ट को बनाने के लिए 11 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई को तवाघाट-लिपुलेख मार्ग का उद्घाटन किया था. उन्होंने कहा था कि इससे कैलाश मानसरोवर जाने के लिए पहले से कम वक्त लगेगा.

सेना प्रमुख नरवणे ने इस मसले पर कही ये अहम बात
वहीं इस मामले पर भारत के सेना प्रमुख नरवणे ने परोक्ष रूप से चीनी भूमिका का संकेत देते हुए कहा कि यह मानने के कारण हैं कि उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक भारत के सड़क बिछाने पर नेपाल किसी और के कहने पर आपत्ति जता रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि चीनी सेना के साथ हाल की तनातनी पर भारतीय सेना सिलसिलेवार तरीके से निपट रही है.

भारत द्वारा लिपुलेख-धारचुला मार्ग तैयार किये जाने पर नेपाल द्वारा आपत्ति किये जाने के सवाल पर जनरल नरवणे ने कहा कि पड़ोसी देश की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली थी. सेना प्रमुख ने कहा, ‘काली नदी के पूरब की तरफ का हिस्सा उनका है. हमने जो सड़क बनाई है वह नदी के पश्चिमी तरफ है. इसमें कोई विवाद नहीं था. मुझे नहीं पता कि वे किसी चीज के लिये विरोध कर रहे हैं.’