बड़ी खबर: अब आयुर्वेद से हो सकता है कोरोना का इलाज, अश्वगंधा समेत इन 4 दवाओं का होगा क्लिनिकल ट्रायल

भारत में कोरोना के मामलों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. अब तक कोरोना वायरस के 78 हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं. कोरोना के इलाज के लिए अभी तक न तो कोई दवा मिली है और न ही कोई वैक्सीन मिली है. इस बीच आयुष मंत्रालय ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के साथ मिलकर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 4 महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के क्लिनिकल ट्रायल शुरू करेगा. अश्वगंधा, गुडूची, यष्टिमधु और पीपली दवाओं का क्लिनिकल ट्रायल इस हफ्ते शुरू हो जाएगा.

आयुष मंत्रालय ने गुरुवार को ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी. केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपद वाई नाइक ने ट्वीट में कहा, ‘आयुष मंत्रालय और सीएसआईआर कोरोना वायरस के इलाज में मिलकर काम कर रहे हैं. इसके तहत अगले हफ्ते से 4 आयुर्वेदिक दवाओं का क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो जाएगा.’

मंत्रालय के मुताबिक, ये ट्रायल पहले आरोग्य सेतु ऐप द्वारा चिह्नित उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में किए जाएंगे. उसके बाद इनका ट्रायल हेल्थ वर्कर पर किया जाएगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और पुणे जैसे शहरों के 50 लाख से अधिक लोग ट्रायल का हिस्सा होंगे.

मंत्रालय का फैसला ऐसे वक्त पर आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘लोकल-वोकल’ का मंत्र दिया है. मंगलवार को कोरोना संकट पर देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया था. पीएम मोदी ने इस दौरान लोकल को प्रोत्साहित करते हुए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता को कम करने की बात कही थी.

बता दें कि कोरोना के इलाज के लिए वैसे तो कई आयुर्वेदिक दवाओं के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी के आधिकारिक तौर पर पर पुष्टि नहीं हुई है. भारत में फिलहाल प्लाज्मा थेरेपी से मरीजों का इलाज किया जा रहा है. कुछ केस में ये कारगर भी साबित हो रहा है.


आयुष मंत्रालय कुछ निवारक मामलों में आयुष-आधारित रोगनिरोधी हस्तक्षेपों के प्रभावों का भी अध्ययन कर रहा है. पहले चरण में, रोगियों को अश्वगंधा और उसके बाद अन्य दवाएं दी जाएंगी. हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनमें लक्षणों की प्रतिक्रिया कैसी है या उनमें संक्रमण की गंभीरता कितनी है.