लॉकडाउन के दौरान दुनिया के कुछ नेताओं की लोकप्रियता बढ़ी, पीएम मोदी सबसे ऊपर

दुनियाभर में तबाही मचाने वाली महामारी प्‍लेग ने कई सत्‍ताओं की जमीन हिला दी थी. कई नेता अपनी साख तक नहीं बचा पाए थे. वहीं, कोरोना वायरस का सत्‍ता और सत्‍ताधीशों की साख पर ठीक उलटा असर होता दिखाई दे रहा है. दुनियाभर के ज्‍यादातर नेताओं की लोकप्रियता में वैश्विक महामारी के बीच इजाफा ही हुआ है, जबकि कोरोना वायरस से अब तक दुनियाभर में 2,87,332 लोगों की मौत हो चुकी है.

अमेरिका समेत कई देशों की सरकारें इस वैश्विक महामारी के आगे घुटने टेक चुकी हैं और कई देश लॉकडाउन की अवधि में वृद्धि करने से आगे कुछ सोच भी नहीं पा रहे हैं. अमेरिका की रिसर्च फर्म मॉर्निंग कंसल्‍ट ने पाया कि वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन के 11 मार्च को कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित करने के बाद से दुनिया के 10 नेताओं की लोकप्रियता में 9 फीसदी की वृद्धि हुई है. इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे ऊपर हैं. भारत के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया, कनाडा और जर्मनी के शीर्ष नेताओं की लोकप्रियता में इजाफा दर्ज किया गया है.

विशेषज्ञ इस पैटर्न को ‘रैली-राउंड-द-फ्लैग’ प्रभाव कहते हैं. इसने समय-समय पर अंतरराष्‍ट्रीय संकटों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपतियों को काफी फायदा पहुंचाया है. अध्ययन में पाया गया है कि बढ़ती देशभक्ति और उदार विपक्ष दोनों का इन शीर्ष नेताओं की लेाकप्रियता में इजाफा करने में योगदान है. हालांकि, अभी तक सभी तबाही नेताओं के लिए वरदान साबित नहीं हुई हैं. अमेरिका में 2005 में तूफान कैटरीना के दौरान तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की रेटिंग खराब हो गई थी.

वहीं, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्‍लेयर की लोकप्रियता 2005 में हुए लंदन ब्‍लास्‍ट के बाद काफी गिर गई थी. इसके अलावा फ्रांस के पूर्व राष्‍ट्रपति फ्रांस्‍वा ओलांद की लेाकप्रियता 2015 में पेरिस हमलों के घट गई थी. शायद मतदाताओं को लगा कि वे आतंकवाद को अच्छी तरह से निपटने में नाकाम रहे हैं. वहीं, अमेरिका के लोगों ने 2001 में हुए हमलों को युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखा था.


साभार-न्यूज़ 18