‘कोरोना के साथ जीना-ऐहतियात को जीवन शैली का हिस्सा बनाना सीखना होगा’

देश में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के बीच केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि लोगों को अब ‘कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा.’

गौरतलब है कि शनिवार तक देश में कोरोना वायरस से अभी तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या करीब 60,000 पहुंच गई है जबकि संक्रमण से मरने वालों की संख्या 1,900 से ज्यादा हो गई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार शाम की जिलेवार स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि देश के 216 जिले ऐसे हैं जिनमें कोरोना वायरस संक्रमण का अभी तक कोई मामला नहीं आया है, वहीं कई जिलों में हालात पहले से सुधरे हैं और वहां भी मामले आने बंद हो गए हैं.

साथ ही मंत्रालय ने कोविड-19 से बचाव को ही इसके खिलाफ प्रभावी हथियार बताते हुए लोगों से कहा कि वे फिलहाल संक्रमण से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों को अब अपनी जीवन शैली का हिस्सा बना लें.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में कोविड-19 मरीजों की संख्या दोगुने होने का समय पहले के मुकाबले कम हुआ है. उन्होंने बताया कि दो दिन पहले तक औसतन 12 दिन में संक्रमित लोगों की संख्या दोगुनी हो रही थी लेकिन आज यह औसत 10 दिन का है.

लेकिन साथ ही अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि इन दिनों ‘क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए’ का यदि कड़ाई से पालन किया गया, तो कोविड-19 के मामलों को चरम पर पहुंचने से रोका जा सकता है. अग्रवाल ने कहा, ‘ऐसे में जब हम लॉकडाउन में छूट या ढील की बात कर रहे हैं और प्रवासी श्रमिक अपने-अपने घर लौट रहे हैं, तो हमारे सामने एक बड़ी चुनौती पैदा हो रही है और हमें अब कोरोना वायरस के साथ रहना सीखना होगा.’

संयुक्त सचिव ने कहा, ‘और जब हम वायरस के साथ जीना सीखने की बात कर रहे हैं तो यह महत्वपूर्ण है कि स्वयं को वायरस संक्रमण से बचाने के लिए जारी दिशा-निर्देशों को पूरा समाज अपने अंदर समाहित करे और उसे अपनी जीवन शैली का हिस्सा बनाए.’ उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी चुनौती है और सरकार को इसके लिए समाज का सहयोग चाहिए.