बड़ी खबर: फाइज़र ने कोरोना वायरस वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया, सफल रहा तो इस महीने तक बाजार में होगी उपलब्ध

फार्मा कंपनी फाइज़र (Pfizer) और जर्मनी की BioNtech ने संभावित कोरोना वायरस वैक्सीन (COVID-19 Vaccine) का मानव ट्रायल शुरू कर दिया है. सोमवार से यह ट्रायल अमेरिका में किए जा रहे हैं. अगर वैक्सीन का यह ट्रायल सफल हो जाता है तो सितंबर महीने से इस वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाएगा. ये दोनों कंपनियां मेसेंजर RNA नाम की जेनेटिक मैटेरियल (Genetic Material) के आधार एक साथ मिलकर वैक्सीन बनाने में लगी हुई हैं.

कैसे काम करेगा यह वैक्सीन?

मेसेंजर RNA का काम मानव बॉडी में मौजूद सेल्स को प्रोटीन बनाने के लिए अनुदेश (Instruction) देना होता है. विशेष तौर पर तैयार किए गए इन मेसेंजर RNA को मानव बॉडी में डाला जाएगा ताकि वो सेल्स को कोरोना वायरस के लिए स्पाइक प्रोटीन (Spike Protein) बनाने का इंस्ट्रक्शन द सकें. इस प्रक्रिया में कोई व्यक्ति बीमार भी नहीं होगा. आमतौर पर यह वायरस इस प्रोटीन का इस्तेमाल करके फेफड़ों के सेल्स तक पहुंचते हैं. ऐसे में यह वैक्सीन एक स्वस्थ्य रोग प्रतिरोधक सिस्टम को इस संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने का काम करेगा.

पारं​परिक वैक्सीन से अलग

वैक्सीन बनाने के लिए जिस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, वो सबसे तेज प्रक्रिया में से एक और पारंपरिक वैक्सीन से अधिक स्टेबल होगा है. पारंपरिक वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में कमजोर वायरस की मदद से इंसानों के शरीर में एंटीबॉडी तैयार की जाती है ताकि भविष्य में ऐसे किसी संक्रमण से लड़ने ​के लिए बॉडी तैयार रहे.

अन्य फार्मा कंपनियां भी इसी तकनीक पर काम कर रहीं
Moderna, Inovio, Cansion और अन्य कई फॉर्मा कंपनियां इसी प्रक्रिया के तहत वैक्सीन तैयार करने की कोशिश कर रही हैं. कुछ कंपनियों ने मानव ट्रांयल के पहले चरण को ​पिछले सप्ताह ही शुरू कर दिया था. लेकिन, इस टेक्नोलॉजी से बना कोई भी ऐसा वैक्सीन अभी तक बाजार नहीं पहुंचा है.

पहले चरण में 360 लोगों को होगा ट्रायल
न्यूयॉर्क स्थित फाइज़र और बायोएनटेक पिछले महीने ही BNT162 नाम के एक वैक्सीन को जर्मनी के 12 स्वस्थ्य लोगों में ट्रायल किया था. बाद में इस ट्रायल को 1,200 लोगों में किया गया. अब अमेरिका में ये दोनों कंपनियां एक साथ मिलकर पहले स्टेज में 360 लोगों पर ट्रायल करना चाहती हैं. दूसरे स्टेज में इसमें 8,000 लोगों की मदद ली जाएगी. यह स्टडी न्यू यॉर्क के चार मेडिकल सेंटर में किया जाएगा. इसमें न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी के ग्रॉसमैन स्कूल आफ मेडिसिन, यूनिवर्सिटी आफ रोकेस्टर मेडिकल सेंटर, यूनिवर्सिटी आफ मैरीलैंड स्कूल आफ मेडिसिन और सिनसिनाटी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर शामिल हैं.

साभार-न्यूज़ 18