बड़ी इलायची : सेहत का भी ख्याल , जेब माला माल

प्राचीन काल से ही मनुष्य पौधों का विभिन्न प्रकार से उपयोग करता आ रहा है, जैसे भोजन, कपड़े, औषधि, मकान, इत्यादि. अधिकांश औषधियां वनस्पतियों से ही प्राप्त की जाती हैं. वानस्पतिक विविधता से ही विभिन्न प्रकार की पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों का विकास हुवा है जैसे आयुर्वेद, तिब्बती, यूनानी एवं शिधा.

आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली में सम्पूर्ण पौधे या उनके किसी विशेष भाग जैसे जड़, तना, पत्ती फूल या बीज औषधि के रूप में प्रयोग में लाये जाते हैं. ये भी सत्य है कि ग्रामीण वनस्पतियों के अधिक सम्पर्क में रहते हैं जिससे वे औषधीय वनस्पतियों के नाम एवं उनके गुणों से पीड़ी दर पीड़ी परिचित होते आ रहे हैं.

हिमालयी क्षेत्रों की बात करें तो हमारा देश औषधीय पादपों का एक बड़ा भण्डार है, जिनको हम विभिन्न प्रकार से अपनी रोजमर्रा के जीवन में उपयोग करते रहते हैं.

यदि हम सिर्फ उत्तराखण्ड की ही बात करें तो यहाँ गढ़वाल तथा कुमाऊँ मण्डल में घाटी से लेकर चोटी तक विभिन्न प्रकार के औषधीय पादप प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं या बाहरी राज्यों से लाकर उत्पादित किये जाते हैं. इन्हीं वनस्पतियों में
उत्तराखंड के मध्य ऊँचाई (1000-2000 मी० तक) वाले भागों में उतीश के पेड़ों के साथ, नमी वाली ढालदार जमीन या नमी वाले बगीचों, खेतों में उत्पादित की जा रही बड़ी इलायची भी है. बड़ी इलायची में फूल अप्रैल से जून तथा पैदावार अगस्त माह से मिलनी प्रारम्भ हो जाती है. उत्तराखन्ड के किसान एक कीलो बडी़ इलायची को लगभग 1500 से 2000 रू0 कीलो तक बेच रहे हैं।

बड़ी इलायची का वानस्पतिक नाम ” Amomum subulatum ” और ” Amomum aromat.cum ” हैं. इस जिंजिबेरेसी (Z.ng.beraceae)
कुल के पादप को अंगरेजी में इण्डियन कार्डेमम, ब्लैक कार्डेमम, बेंगाल कार्डेमम, ग्रेटर कार्डेमम तथा हिन्दी में बड़ी इलायची, काली इलायची, भूरी इलायची, लाल इलायची, नेपाली इलायची या बंगाली इलायची भी कहते है. आयुर्वेद और यूनानी उपचार में इसके बीजो के लगभग वे ही गुण बताए गये हैं, जो छोटी इलायची में होते हैं। बड़ी या काली इलायची खाने के बड़े ही फायदे हैं। भारत में हज़ारो सालो से इलायची का उपयोग मसालो के रूप में किया जा रहा हैं. बड़ी इलायची (Bad. Ela.ch.) के फल, सुगंध और काले रंग के बीजों से भला कौन अपरिचित हो सकता है। भारतीय रसोई में यह इस तरह से रची बसी है कि इसका प्रयोग मसालों से लेकर मिठाइयों तक में किया जाता है। इसके बीजो से कपूर जैसी सुगंध आती हैं। छोटी इलायची मीठे पकवानो का स्वाद बढ़ाने का काम करती हैं. वही बड़ी इलायची नमकीन पकवानो के स्वाद को दुगुना करती हैं। भारत के पुर्वी राज्यों खासकर सिक्किम में यह सबसे ज़्यादा पैदा होती हैं। भारत में पैदा की जाने वाली बड़ी इलायची सिर्फ़ एक मसाला भर ही नही हैं, बल्कि एक बढ़िया औषधि भी हैं। आयुर्वेद के अनुसार, बड़ी इलायची की तासीर उष्ण यानी गरम होती है। इसके इन्ही गुणों के कारण इसे मसालो की रानी भी कहा जाता हैं।

आओ जाने बड़ी इलायची के अद्भुत फायदे:- (कोविड 19 से बचाव में मददगार)

-बड़ी इलायची खाने से सांस की बीमारी में फाइदा मिलता है। इसके नियमित सेवन से अस्थमा, कुकुर खाँसी, फेफड़े का सिकूड़ना, फेफड़े की सूजन और तपेदिक (टीबी) आदि रोगो से छुटकारा पाया जा सकता हैं। सर्दी खासी में भी बड़ी इलायची का सेवन फायदेमन्द
होता है।

-बड़ी इलायची एक बेहतरीन डेटोक्स का भी काम करती है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, विटामिन सी और पोटैशियम की मात्रा पाए जाने से यह शरीर से विषैले (ज़हरीले) तत्वो को बाहर निकाल कर शरीर को सेहतमंद बनाती हैं।

-बड़ी इलायची को चबाने से मुंह की बदबू भी ठीक हो जाती है। यह ना सिर्फ मुंह की बदबू या यूं कहें गंदी स्मेल को दूर करने का
काम करती है, बल्कि मुंह के अंदर होने वाले इनफेक्शन या घावो को ठीक करने का काम भी करती है।

-बड़ी इलायची में दर्द को दूर करने की अनोखी क्षमता पाई जाती है. विशेषकर, सिरदर्द में तो यह रामबाण की तरह काम करती है.

बडी़ इलायची के बीजों से तैयार किए जाने वाले खुसबूदार तेल का से मसाज करने से सिरदर्द, टेंशन और थकान जैसी समस्याएँ दूर हो जाती हैं।

-बड़ी इलायची में एंटी-कैंसर, एंटी-ऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं. यह ब्रेस्ट, कोलन और ओवेरियन कैंसर को रोकता हैं. बड़ी इलायची के निरन्तर सेवन से कैंसर सेल का निर्माण और विकास भी रुक जाता हैं।

-बड़ी इलायची का सेवन Gastro.ntest.nal system के लिए खास करके फायदेमंद होता हैं. इसका शरीर के हाज़मे पर बहुत ही अच्छा असर होता हैं. इसके सेवन से एसिडिटी की समस्या से छुटकारा मिलता हैं. इसके नियमित सेवन से गैस्ट्रिक अल्सर और दूसरी पाचन संबंधी बीमारियो का ख़तरा काफ़ी कम हो जाता है। सौंफ के साथ बड़ी इलायची खाने से पाचन में फायदा होता है.

-बड़ी इलायची का सेवन यूरिनरी हेल्थ के लिए भी अच्छा माना जाता हैं. यह एक बेहतरीन डाइयुरेटिक भी हैं. इसके सेवन से ना सिर्फ़ यूरिनेशन सही रहता हैं, बल्कि किडनी (गुर्दे) से रिलेटेड बीमारिया भी दूर हो सकती हैं।

-बड़ी इलायची के सेवन से बाल काले, घने और मजबूत बन जाते हैं. इसमे मौज़ूद तत्वो के कारण बालो को पोषण मिलता हैं।

-बड़ी इलायची के नियमित सेवन से स्किन चमकने लगती हैं. स्किन एलर्जी की समस्या में बड़ी इलायची अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण नेचुरल रेमेडी की तरह काम करती है।

-बड़ी इलायची में एंटी-सेपटिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. इसमें कई तरह के बैक्टीरिया को ख़त्म करने की शक्ति होती हैं.

-बडी़ इलायची खाने से बैक्टीरियल और वायरल दोनों प्रकार के इन्फेक्शन से बचाव होता हैं। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को मजबूत करने में सहायक है.

-बड़ी इलायची का सेवन दिल के मरीज़ो के लिए भी काफ़ी फायदेमंद हैं. इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता हैं. अगर आप नियमित रूप से बड़ी इलायची का सेवन करेंगे तो आपका दिल हेल्दी रहेगा. यह खून के जमने की संभावना को भी काफ़ी हद तक कम कर देता हैं।

– बड़ी इलायची में विटामिन सी और अन्य ज़रूरी खनीज़ भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके नियमित सेवन से रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और शरीर सेहतमंद बना रहता हैं।

-बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर छालों पर लगाने से छाले भी ठीक हो जाते हैं। यदि दांत में दर्द हो रहा हो तो बड़ी
इलायची और लौंग के तेल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर पीड़ायुक्त दांत पर लगाएं, दर्द में कमी आ जाती है।

-बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर-बराबर पीसकर एक दो मात्रा लेने से अधिक थूक या लार आनें की स्म्श्या से छुटकारा मिल जाता
है।

-बड़ी इलायची के तेल में मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से दमा में लाभ होता है।

बड़ी इलायची में पाए जाने वाले खास किस्म के पोषक तत्व, फाइबर और तेल कई तरह की बीमारियों को दूर करने में कारगर होते है.

याद रहे जडी़ बूटियों का फाइदा तभी मिलता है जब आप उनका निरन्तर सेवन करते हैं। ये बीमारी ठीक करने से ज्यादा बिमारी न होने देने में मददगार होती हैं।

इसलिये आप

यदि आप सहमत हों तो बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक रूप से करें बड़ी इलायची का नियमित सेवन.

बड़ी इलायची की पौध के लिए जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान, मण्डल, गोपेश्वर में सम्पर्क किया जा सकता है.

साभार-अंकित बालियान
सहायक प्रबंधक कृषि उद्यान
चमोली