विधि विधान के साथ खुले केदारनाथ मंदिर के कपाट, अभी श्रद्धालुओं को दर्शन इजाजत नहीं

केदारनाथ मंदिर के कपाट बुधवार को सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर खुल गए. इस मौके पर पुजारियों ने परंपरागत तरीके से मंत्रोच्चारण के साथ बाबा केदारनाथ की पूजा-आर्चना की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पहली पूजा की गई और इसके साथ ही हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ के रूप में ख्यात केदारनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए. इससे पहले भगवान शिव के इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर को फूलों से सजाया गया, जिसकी सुंदरता देखते ही बन रही है.

इस साल केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में खास बात यह है कि श्रद्धालु भगवान शंकर के दर्शन नहीं कर पाएंगे. कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन की वजह से मंदिर के कपाट निर्धारित समय पर तो खोल दिए गए हैं, लेकिन अभी श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी. मंदिर के मुख्य पुजारी सहित केवल 16 लोग ही यहां पर उपस्थित रह सकते हैं.

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. बीते 26 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धामके कपाट खुलने के साथ ही इस पवित्र यात्रा की शुरुआत हो गई. चारधाम यात्रा के शुरू होने के साथ ही अब लोगों को बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलने का इंतजार था. जिसे 29 अप्रैल यानी कि आज खोला जा चुका है. वहीं इससे पहले सोमवार को परंपरागत रूप से बाबा केदार की डोली निकाली गई.

कड़ाके की ठंड और हड्डी गला देने वाली बर्फ के बीच श्रद्धालु नंगे पांव ही बाबा केदार की डोली लेकर केदारनाथ धाम की ओर बढ़ चले. हालांकि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम को लेकर अभी लॉकडाउन है. उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में लोग अपने घरों में कैद हैं. बावजूद इसके जिसने भी इस मनोहारी दृश्य को देखा, वह विभोर हो गया.

बुधवार को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व सोमवार को बाबा केदार की डोली को लेकर बर्फ और कड़ाके की ठंड के बीच पूरे सम्मान के साथ भक्त केदरनाथ धाम की तरफ बढ़ते गए. आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य के द्वारा बनाए गए केदारनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए साल में 6 महीने ही खोले जाते हैं. मान्यता है कि डोली उठाने वाले भक्त नंगे पैर ही डोली को लेकर जाते हैं.