भारत ने चीन को सबक सिखाने के लिए उठाया ये बड़ा कदम

भारत द्वारा किए गए एफडीआई नियमों में बदलाव पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. भारत में चीन के राजदूत ने इन बदलावों को डब्लूटीओ नियमों के खिलाफ बताया है. चीन की तरफ से कहा गया है कि चीन ने भारत में बहुत बड़ा निवेश किया है. भारत में चीन ने 8 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है. चीन के निवेश से भारत में बहुत सारे जॉब क्रिएट हुए हैं. चीन द्वारा हाल ही में किए गए निवेश का कोई गलत उद्देश्य नहीं है. भारत की तरफ से चीन के निवेश को रोकने के लिए उठाया गया कदम उदारीकरण की नीतियों के खिलाफ है. चीन अभी सिर्फ भारत सरकार को एक चिट्ठी लिख कर अपनी आपत्ति जताई है. लेकिन आगे ये मामला डब्लूटीओ तक जा सकता है.

चीन से आने वाले विदेशी निवेश पर सरकार ने सख्ती कर दी है. सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि जिन-जिन देशों से भारत की सीमा लगती है वहां से होने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी. अब तक ये इन्वेस्टमेंट ऑटोमेटिक रूट से हो जाते थे. अब चीन समेत सभी पड़ोसी देशों से एफडीआई पर मंजूरी लेनी जरूरी होगी.

मैनेजमेंट कंट्रोल पर असर पड़ने वाले एफडीआई पर भी मंजूरी जरूरी होगी. बता दें कि जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया,स्पेन, इटली ऐसा ही कदम उठा चुके हैं. कोरोना की वजह से ये कदम उठाए गए हैं. सरकार के इस कदम का लक्ष्य वैल्यूएशन में गिरावट का फायदा उठाने वालों पर सख्ती करना है. सरकार ने यह निर्णय हाल ही में चाइना के सेंट्रल बैंक द्वारा भारतीय कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉपोर्रेशन (HDFC)में हिस्सेदारी बढ़ाकर 1 फीसदी से कुछ ज्यादा करने के बाद लिया है. गौरतलब है कि ऐसी खबरें आई है कि कोरोना से फैली अफरा-तफरी का फायदा उठाते हुए चीन पूरी दुनिया में अपना निवेश तेजी से बढ़ा रहा है.

क्या है पूरा मामला?
सेबी अभी चीन और भारत के दूसरे पड़ोसी देशों से आने वाले एफपीआई निवेश की जांच कर रहा है. कुछ दिनों पहले ही मार्केट रेगुलेटर ने कस्टोडियन को भेजे अपने संदेश में लिखा था, “जिन एफपीआई का बेनिफिशयरी अकाउंट चीन और हॉन्गकॉन्ग के हैं उनकी जानकारी तुरंत मुहैया कराई जाए.”

इस पूरे मामले की शुरुआत एचडीएफसी में चीन के निवेश के साथ हुई थी. 13 अप्रैल को एचडीएफसी ने कहा था कि चीन के पीपल्स बैंक (PBOC) ने मार्च तिमाही में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 0.8 फीसदी से बढ़ाकर 1.01 फीसदी कर लिया है. पीपल्स बैंक ने यह हिस्सेदारी ओपन मार्केट से खरीदी है. ऐसे में कई लोग इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि एफपीआई रूट के जरिए ओपन मार्केट से स्टेक खरीदना अधिग्रहण के लिहाज से बेहद संवेदनशील है.