चैत्र नवरात्रि 2020 : ऐसे करें मां चन्द्रघण्टा की आराधना, मिलेगी अपार सफलता

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है. यह देवी बाघ की सवारी करती व मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करती हैं जो घंटे के समान प्रतीत होता है. इसलिए उन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है. उनके दस हाथ हैं जिनमें से बाएं चार हाथों में वह त्रिशूल, गदा व तलवार धारण करती हैं और उनका पांचवां हाथ वरद मुद्रा में रहता है. वहीं दाहिने चार हाथों में वह पुष्प, तीर, धनुष व जपमाला धारण करती हैं और उनका पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है.

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना होती है. यह देवी बाघ की सवारी करती व मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करती हैं जो घंटे के समान प्रतीत होता है. इसलिए उन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है. उनके दस हाथ हैं जिनमें से बाएं चार हाथों में वह त्रिशूल, गदा व तलवार धारण करती हैं और उनका पांचवां हाथ वरद मुद्रा में रहता है. वहीं दाहिने चार हाथों में वह पुष्प, तीर, धनुष व जपमाला धारण करती हैं और उनका पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है.

पूजा विधि, भोग व कथा

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कनेर के पुष्प से करें. कहा जाता है कि उन्हें कनेर का फूल अत्यंत प्रिय है, इसलिए भक्तों को पूजा में इस फूल को चढ़ाना चाहिए. देवी का यह रूप देवी पार्वती का विवाहित रूप है. भगवान शिव के साथ विवाह के बाद देवी महागौरी ने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया इसलिए उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा.

चंद्र हमारे बदलते भावों और विचारों का कारक माना जाता है. मां चंद्रघंटा की आराधना कर सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाकर दैविय चेतना का साक्षात्कार करता है. चंद्रघंटा मां का यह स्वरूप दस भुजाधारी का है.जिनमें देवी चंद्रघंटा के एक हाथ में कमल का फूल, एक में त्रिशूल, एक में गदा, एक में तलवार, एक में धनुष और एक में बाण है. देवी का एक हाथ हृदय पर, एक हाथ अभय मुद्रा में और एक हाथ आशिर्वाद मुद्रा में है.

भगवती गले में सफेद फूलों की माला धारण करती है और रत्नों से जड़ित आभूषण पहने होती है. साधकों को इनका स्वरूप सौम्य, शांत और भव्य दिखाई पड़ता है. चंद्रघंटा मां की भक्ति करने से साधक साहस, अभय, सौम्यता और विनम्रता को प्राप्त करते है. इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थित रहता है.

माता चंद्रघंटा का उपासना मंत्र
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता.
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
चन्द्रघंटा माता की आरती
जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम, पूर्ण कीजो मेरे काम.
चन्द्र समान तू शीतल दाती, चन्द्र तेज किरणों में समाती..
क्रोध को शांत बनाने वाली, मीठे बोल सिखाने वाली.
मन की मालक मन भाती हो, चन्द्र घंटा तुम वरदाती हो..
सुंदर भाव को लाने वाली, हर संकट मे बचाने वाली.
हर बुधवार जो तुझे ध्याये, श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय..
मूर्ति चंदर आकार बनाये, सन्मुख घी की ज्योत जलये.
शीश झुका कहे मन की बाता, पूर्ण आस करो जगदाता..
कांची पुर स्थान तुम्हारा, करनाटिका मे मान तुम्हारा.
नाम तेरा रटू महारानी, ‘भक्त’ की रक्षा करो भवानी..