निर्भया मामला: फांसी से पहले और बाद तिहाड़ का कैसा था माहौल, जानिए

नहाने से इनकार करना, नाश्ता न करना और बस लगातार रोना. तिहाड़ में फांसी से पहले निर्भया के दोषियों का हाल ऐसा था. 20 मार्च 2020, निर्भया को इंसाफ मिल गया. उसके साथ दरिंदगी करनेवाले चारों दोषियों (मुकेश, पवन, विनय और अक्षय) को फांसी हो गई. फांसी से पहले और बाद तिहाड़ का कैसा माहौल था, यहां पढ़ें सुबह 3 बजे से लेकर शाम तक क्या-क्या हुआ.

नहाए नहीं, नाश्ता नहीं किया
गैंग रेप कांड के इन चारों दोषियों को सुबह 3.30 पर उठाया जाना था, लेकिन दोषी रातभर सोए ही नहीं थे. फिर उन्हें नहाने को कहा गया, चारों ने इनकार कर दिया. चारों को काले कपड़े दिए गए जो उन्होंने पहन लिए. नाश्ता पूछा गया, उसके लिए भी चारों ने इनकार किया. फिर जेल स्टाफ ने कहा आखिरी बार उस भगवान को याद कर लो, जिसे मानते हो. पूजा खत्म ही हुई थी कि डॉक्टर आ गए. उन्होंने चारों की जांच की. फिर पुलिस अधिकारी ने फांसी का ऑर्डर यानी ब्लैक वॉरंट पढ़कर सुनाया. इसके बाद चारों को कुछ देर अकेले छोड़ दिया गया. इस दौरान पवन और विनय रोने लगे.

4.30 पर शुरू हुई फांसी की तैयारी
सुबह 4.30 पर उन्हें फांसी घर लाने के लिए तैयार कर लिया गया. इसके बाद उन्हें फांसी के तख्ते तक लाया जाने लगा. मुंह पर काला कपड़ा था, हाथ पीछे की तरफ बंधे थे. बावजूद इसके विनय और पवन खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे. वे रोए, फांसी घर में लेट तक गए. फिर पुलिसवालों की मदद से उन्हें फंदे तक लाया गया.

एक इशारा और फांसी के फंदे पर झूल गए चारों
फिर 5.30 पर पुलिस अधिकारी के इशारे पर पवन जल्लाद ने लीवर खींच दिया, पवन की मदद के लिए एक पुलिस स्टाफ था. इशारा मिलते ही लीवर खिंचा और चारों फंदों पर झूल गए. 6 बजे तक चारों ऐसे ही फंदों पर झूलते रहे और धीरे-धीरे मौत ने उन्हें अपने आगोश में ले लिया. फिर थोड़ी देर बाद डॉक्टर ने उनको चेक करके मृत घोषित किया.

कोई भी नहीं छटपटाया, एक ही झटके में चली गई चारों की जान
फांसी पर लटकाने से पहले सोचा जा रहा था कि ये फांसी पर लटकाते ही तड़पेंगे, छटपटाएंगे, अपनी जिंदगी की भीख मांगेगे या कोई और प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. फांसी पर लटकाते ही चारों की बॉडी में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. एक ही झटके में इनके प्राण निकल गए.

5 मिनट अधिक लटकाया
जेल मैनुअल के हिसाब से चारों दोषियों को 30 मिनट तक लटकाकर रखना था, लेकिन डॉक्टरों ने इन्हें 5 मिनट अधिक वक्त तक लटकाए रखा. हालांकि, एक ही झटके में चारों की मौत हो गई थी.

5 घंटे चला पोस्टमॉर्टम, फिर परिवार को सौंपी डेडबॉडी
सुबह 8:38 मिनट पर ऐंबुलेंस इनके शव लेकर डीडीयू पहुंची. तकरीबन नौ बजे बॉडी का पोस्टमॉर्टम किया गया. धीरे-धीरे दोषियों के परिजन भी अस्पताल में आना शुरू हो गए थे. सबसे पहले 11 बजे करीब अक्षय के परिजन पहुंचे थे. लेकिन किसी से कोई बात नहीं कर रहे थे, एक कोने में सिर्फ अपने घर के सदस्य की बॉडी का इंतजार कर रहे थे. वहीं 12 बजे तक सभी की फैमिली अस्पताल में पहुंच चुकी थी. तकरीबन पांच घंटे पोस्टमॉर्टम होने के बाद बॉडी परिजन को 1:30 बजे करीब सौंप दी गई. इनमें से तीन का अंतिम संस्कार दिल्ली में हुआ और एक को बिहार लेकर जाया गया.

साभार-नवभारत