पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत ने फारूक अब्दुल्ला की रिहाई को लेकर किया ये बड़ा खुलासा…

करीब 7 महीने नजरबंद रखने के बाद नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला को नजरबंदी से रिहा किया गया. फारूक की इस तरह अचानक हुई रिहाई से हर कोई हैरान है. इन सब के बीच आईबी के विशेष निदेशक और रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत ने फारूक अब्दुल्ला की रिहाई को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

दुलत के मुताबिक वह खुद फारूक अब्दुल्ला से मिले थे, जिसके बाद ही केंद्र सरकार की ओर से उन्हें रिहा करने का फैसला लिया गया. दुलत ने दावा किया है कि मुलाकात के दौरान फारूक ने साफ तौर पर कहा था कि वह और उनका बेटा देश के खिलाफ बिल्कुल भी नहीं है.

दुलत ने बताया कि हाल में उन्होंने जब कश्मीर का दौरा किया था, उस वक्त उन्हें विशेष मिशन के लिए वहां भेजा गया था. उन्होंने बताया कि इस मिशन का नाम ‘मिशन फारूक’ था. कश्मीर दौरे के दौरान वह फारूक अब्दुल्ला से मिले और इसकी जानकारी उन्होंने एनएसए अजित डोभाल और प्रधानमंत्री कार्यालय को भी दी थी. उन्होंने बताया कि जब वह पूर्व सीएम से मिले तो वह काफी थके हुए लग रहे थे और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं लग रही थी. फारूक ने जोर देकर दुलत से कहा कि भारत के लिए वह पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं.

बता दें कि एएस दुलत को कश्मीर का पुराना एक्सपर्ट कहा जाता है. दुलत ने 1999 में हुए कंधार कांड में अहम भूमिका निभाई थी. गौरतलब है कि आतंकी संगठन हरकत उल मुजाहिद्दीन ने 1999 में भारतीय जहाज आईसी 814 का अपहरण कर लिया था. इस विमान में 176 यात्री और 17 क्रू मेंबर्स मौजूद थे. कंधार प्रकरण के अलावा रूबिया अपहरण मामले में भी दुलत ने मध्यस्थता की थी.

दुलत ने बताया कि अपने सीक्रेट मिशन से लौटने के करीब एक महीने बाद ही प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से फारूक अब्दुल्ला को रिहा करने का फैसला लिया गया. उन्होंने बताया कि पिछले साल नवंबर में उन्होंने फारूक से मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन तब गृह मंत्रालय ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया था. इसके बाद 9 फरवरी को गृह मंत्रालय की ओर से उनके पास फोन आया कि वह कश्मीर का दौरा कर सकते हैं. इस दौरान उन्होंने फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की. वापस आने के बाद गृह मंत्रालय की ओर से उनके पास फोन आया और उनसे पूछा गया कि मुलाकात कैसी रही.