एमपी के सियासी ड्रामे में नया मोड़, भोपाल वापस आने के लिए बेंगलुरु से लौटने को तैयार विधायक वापस होटल पहुंचे

मध्य प्रदेश के सियासी संकट के बीच बीजेपी और कांग्रेस की रस्साकशी भोपाल से बेंगलुरु तक नजर आ रही है. सिंधिया गुट के बागी विधायकों को मनाने में जुटी कांग्रेस की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है. कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बावजूद बागी विधायकों ने बेंगलुरु से भोपाल आने से इनकार कर दिया है.

भोपाल लौटने से इनकार करने वाले 19 विधायकों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. पूर्व में इन विधायकों ने एमपी के डीजीपी से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की थी. शुक्रवार को इन विधायकों को बेंगलुरु के रिजॉर्ट से कैंपागौड़ा इंटरनैशनल एयरपोर्ट तक लाया गया था, लेकिन बाद में सभी विधायक यहां से वापस होटल लौट गए. बताया जा रहा है कि पूर्व में इन विधायकों को बेंगलुरु से वापस लाने के लिए कांग्रेस की ओर से सारी तैयारियां करा ली गई थीं.

कांग्रेस ने इन विधायकों को वापस लाने के लिए भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर एक विशेष बस का इंतजाम किया था. हालांकि बाद में विधायकों के भोपाल लौटने से इनकार करने पर इस बस को भी वापस बुला लिया गया.

इससे पहले एमपी सरकार के दो मंत्री जीतू पटवारी और लाखन सिंह बागी विधायकों से मिलने के लिए गुरुवार को बेंगलुरु पहुंचे थे. इस दौरान जब इन नेताओं ने विधायकों के होटल में घुसने का प्रयास किया तो पुलिस ने इन्हें रोक लिया. पुलिस अधिकारियों से दोनों विधायकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बहस भी हुई, जिसके बाद कर्नाटक पुलिस के अधिकारियों ने सभी को हिरासत में ले लिया.

इससे पहले, राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ की सलाह पर छह मंत्रियों को उनके पदों से हटा दिया. ये सभी कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं. मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ की सलाह पर छह मंत्रियों को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटा दिया है.’ राज्यपाल ने इमरती देवी, तुलसी सिलावट, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह सिसोदिया और प्रभुराम चौधरी को उनके मंत्री पद से हटाया है.