कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे का असर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी, अब सिर्फ जरूरी मुकदमे सुने जाएंगे

देश दुनिया में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे का असर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी पड़ने जा रहा है. सोमवार से सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ ज़रूरी मुकदमों की सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान एक मामले में सिर्फ एक याचिकाकर्ता और एक वकील को हाज़िर होने की इजाजत होगी. कोर्ट मुकदमे की संवेदनशीलता और जरूरत के हिसाब से सुनवाई करेगा.

जिस केस को टाला जा सकता है उसकी सुनवाई नहीं होगी, जितने मुकदमों में सुनवाई होनी है, उसी के मुताबिक जज उपस्थित होंगे. यानी कोर्ट पूरी तरह से काम नहीं करेगा. ऐसा कोरोना वायरस के मद्देनजर किया गया है. ऐसा अगले आदेश तक चलता रहेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस यानी वैश्विक महामारी (कोविड-19) का शुक्रवार को संज्ञान लेते हुए निर्णय लिया कि सिर्फ आवश्यक मुकदमों की ही सुनवाई होगी और संबंधित वकीलों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को न्यायालय कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. सामूहिक रूप से लोगों के एकत्र नहीं होने के बारे में केंद्र के पांच मार्च के परामर्श का संज्ञान लेने के बाद प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई एक बैठक में यह निर्णय लिया गया.

इस संबंध में जारी शीर्ष अदालत की अधिसूचना में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा जारी परामर्श की समीक्षा करने और चिकित्सा के पेशे में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों की राय तथा सभी आगंतुकों, वादकारियों, वकीलों, न्यायालय के कर्मचारियों, सुरक्षा, रख रखाव और सहायक स्टाफ और मीडियाकर्मियों की सुरक्षा तथा उनके कल्याण को ध्यान में रखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने न्यायालयों में मुकदमों की सुनवाई सिर्फ आवश्यक मामलों तक सीमित रखने का निर्णय लिया है. ऐसे मुकदमों के लिए पीठों की संख्या उतनी ही होगी जो उचित समझी जाएंगी.