पूर्णागिरि धाम को वैष्णो देवी की तर्ज पर किया जाएगा विकसित

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा है कि पूर्णागिरि धाम को वैष्णो देवी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. यहां और सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी. भगत ने बुधवार को मां पूर्णागिरि मेले के शुभारंभ के मौके पर यह बात कही. इससे पूर्व उन्होंने मां की पूजा-अर्चना की और वेद मंत्रोच्चार के साथ मेले के शुभारंभ की घोषणा की. उत्तर भारत में विख्यात यह मेला 15 जून तक चलेगा.

बुधवार को ठूलीगाड़ में मां पूर्णागिरि मेले के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भगत ने कहा कि पूर्णागिरि मेले ने देश-विदेश में पहचान बनाई है. उन्होंने इसके आयोजन के लिए जिला प्रशासन और जिला पंचायत की सराहना की. उन्होंने मेला प्रसाद वितरित करने और भंडारा लगाने वाली महिला शक्ति को और लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बताया. विशिष्ट अतिथि विधायक कैलाश गहतोड़ी ने कहा कि पूर्णागिरि मेले को भविष्य में भी भव्य रूप दिया जाएगा.

मेला समिति अध्यक्ष पंडित भुवन चंद्र पांडेय ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते हुए कहा कि मंदिर समिति श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने का प्रयास करेगी. इससे पूर्व कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए. डीएम एसएन पांडे और एसपी लोकेश्वर सिंह ने ठूलीगाड़ मेला क्षेत्र में तैयारियों का जायजा लिया. उन्होंने श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.

पूर्णागिरि पर्वत पर गिरी थी सती की नाभि
मां पूर्णागिरि मेला का बुधवार को आगाज हो गया. इस बार पूर्णागिरि मेला 97 दिन चलेगा. होली के तुरंत बाद शुरू होने वाला यह मेला उत्तर भारत का सबसे बड़ा मेला है. मान्यता है कि टनकपुर से 25 किमी दूर स्थित अन्नपूर्णा पर्वत में देवी सती की नाभि गिरी थी, तब से पूर्णागिरि मंदिर शक्तिपीठ कहलाने लगा. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आस्था की डोर में बंधे मां के दर्शन के लिए खिंचे चले आते हैं.

करीब 200 वर्ष पुराना है पूर्णागिरि मेला
पूर्णागिरि मेला कब से शुरू हुआ इसके बारे में ठीक से पता नहीं. लेकिन मान्यता है कि यहां का मेला करीब दो सौ साल पुराना है. मंदिर के पुजारी ललित मोहन तिवारी ने बताया कि करीब 200 साल पूर्व गुजरात के काठियावाड़ निवासी चंद्र तिवारी को माता ने सपने में दर्शन दिए.

जिम कार्बेट को भी हुए थे मां पूणागिरि के प्रकाश पुंज के दर्शन
प्रसिद्ध आखेट प्रेमी जिम कार्बेट को भी मां पूर्णागिरि के दर्शन हुए थे. वर्ष 1929 में जिम कार्बेट ने तल्लादेश क्षेत्र को आदमखोर बाघ के आतंक से मुक्ति दिलाई थी. इसी दौरान जिम कार्बेट को मां पूर्णागिरि के प्रकाश पुंज के अद्भुत दर्शन हुए थे. इस बात का जिक्र उन्होंने अपनी पुस्तक टेम्पल टाइगर में भी किया है.