राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता जेन सदावर्ते ने शिव सेना पर लगाया बदसलूकी का आरोप, जानें पूरा मामला

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार जीतने वाली जेन सदावर्ते ने शिवसेना पर आरोप लगाया है कि उसके नताओं ने महिला दिवस पर उनके भाषण को पूरा नहीं होने दिया क्योंकि वह मराठी नहीं जानती थीं. सदावर्ते ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें अपनी बात रखनी थी लेकिन शिवसेना के नेताओं ने उन्हें बीच में रोक दिया और उन्हें बोलने नहीं दिया. सदावर्ते का कहना है कि शिवसेना के नेताओं ने उसके साथ बदसलूकी की.

उन्होंने कहा, ‘जब मैं हिंदी और अंग्रेजी में अपनी रखती हूं तो लोगों को मेरी बात समझ में आ जाती है लेकिन मुझे नहीं पता कि मंच पर मौजूद नेताओं को उस दिन क्या हुआ. वे मेरे भाषण पर नाराज होने लगे और मुझ पर हमला किया. मंच पर शिवसेना के नेता मौजूद थे. मैंने भारत को प्रभावित करने वाले मुद्दों और देश में हो रही गलत बातों पर अपने विचार रखे. जैसे कि शनिवार और रविवार को बच्चों को मिड-डे मील नहीं दिया जाता है. इन तरह के मुद्दों पर मैंने बातें कीं. मैंने ट्रांसजेंडर्स के आरक्षण के बारे में बातें कीं.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि मंच पर मौजूद शिवसेना के नुमाइंदगों एवं उसके विधायकों को क्या हुआ. वे मुझे अपमानित करने लगे. उन्होंने आरक्षण को लेकर झूठ बोला.’ सदावर्ते ने कहा, ‘अपनी बात रखने के लिए भाषा का चुनाव करना मेरा अधिकार है.’

वीरता पुरस्कार विजेता ने कहा, ‘वे मेरे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अपमान करने लगे. हिंदी और अंग्रेजी दोनों केंद्र की भाषाएं हैं और मुझे इन दोनों भाषाओं में अपनी बात रखने का अधिकार है. उन्होंने मुझसे कहा, ‘यदि मैं भारत में रहना चाहती हूं तो मुझे मराठी सीखने होगी.’ सदावर्ते ने कहा, ‘यह मैं किस भाषा में अपनी बात रखना चाहती हूं उसका चयन करना मेराअधिकार है.’ 12 वर्षीय राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता ने कहा, ‘मैं यह नहीं कह रही हूं कि मराठी अच्छी भाषा नहीं है लेकिन मैं जिस भाषा में बोलना चाहती हूं मुझे उस भाषा में बोलने दिया जाए. मुझे मराठी नहीं आती. सरकार को मंच पर झूठ नहीं बोलना चाहिए.’