होल‍िका दहन 2020 : जानें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त-पूजन विधि

इस बार होली का पर्व 10 मार्च यानी मंगलवार को मनाया जा रहा है. होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है. होली के एक एक दिन पहले शाम को लोग होलिका का दहन करते हैं. होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल में किया जाता है. ज्योतिषियों के जानकारों मुताबिक फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा रहित प्रदोष काल में ही होलिका दहन को सही माना गया है.

9 मार्च यानी सोमवार (आज) होल‍िका दहन होगा. इसका शुभ मुहूर्त शाम 6:34 मिनट से लेकर रात 9:00 बजे तक रहेगा. होल‍िका के जलने के बाद बची राख को अगली सुबह शरीर पर लगाने की परंपरा भी है. इस राख को बेहद पव‍ित्र माना जाता है और पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक शरीर पर इसे लगाने से ये तन और मन की बुराइयां दूर हो जाते हैं.

कैसे करें होलिका दहन

पानी के लोटे के साथ एक थाली में पूजन सामग्री रख लें.
सबसे पहले होली की पूजा के लिए रोली, कच्चा सूत, चावल, पुष्प, साबुत हल्दी, बतासे, श्रीफल आदि को एक थाली में रख लें.
इसके बाद संकल्प लें और अपना नाम, पिता का नाम, गोत्र का नाम लेते हुए अक्षत हाथ लेकर गणेश हनुमान जी और शीतला माता और अपने इष्टदेव का नाम जप करें और हालिका पर अक्षत अर्पित कर दें.
इसके बाद होलिका पर पुष्प अक्षत, चंदन और फल, मिठाई चढ़ाएं.
इसके बाद कपूर से अग्नि प्रज्ज्वलित कर होलिका दहन करें.

होलिका दहन से जुड़े हैं कई विधान
होलिका दहन में मनोकामना पूर्ण करने के लिए ज्योतिषियों ने होलिका में अलग-अलग तरह की सामग्री चढ़ाने की विधि बताई है. मिसाल के तौर पर अच्छे स्वास्थ्य के लिए काले तिल के दाने वैवाहिक समस्या के निवारण के लिए हवन सामग्री, बीमारी से मुक्ति पाने के लिए हरी इलाइची और कपूर चढ़ाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक अगर होलिका की आग में कौड़ियां डाली जाती हैं तो इससे जीवन में नकारात्मक शक्तियां खत्म हो जाती है और आस पास की अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं .