गुरुग्राम में नए पुलिस अधिकारियों को डोभाल ने दिया सफलता का मंत्र, केवल निष्पक्ष और विश्वसनीय बनें नहीं बल्कि दिखें भी

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने गुरुवार को कहा कि कानून का राज कायम करने में पुलिस यदि असफल होती है तो इससे लोकतंत्र की नाकामी के रूप में देखा जाता है. यहां युवा पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए एनएसए ने कहा, ‘लोकतंत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सबसे सराहनीय एवं प्रशंसनीय कार्य होता है और आप उन कानूनों को लागू कराने वाले लोग होते हैं. आप यदि कानून लागू कराने में असफल होंगे तो लोकतंत्र नाकाम होगा. कानून तभी बढ़िया है जब जमीन पर उसे लागू किया जाए.’

डोभाल ने कहा, ‘आपको पहले समस्या की पहचान करनी होगी फिर उसकी व्याख्या करनी होगी और फिर उस समस्या के समाधान का हल ढूंढना होगा. समस्या का हल निकालने के लिए आपको इस बारे में सोचना होगा कि तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. बीट कान्स्टेबल को भी तकनीक वाले उपकरण मिलने चाहिए.’

बता दें कि दिल्ली हिंसा को संभालने के लिए अजीत डोभाल ने जिस तरह की तत्परता दिखाई और कार्रवाई की उसकी चारो तरफ प्रशंसा हो रही है. डोभाल के प्रयासों से ही उत्तर पूर्वी दिल्ली के हिंसा ग्रस्त इलाकों में स्थितियां तेजी से सामान्य हुईं और जनजीवन पटरी पर उतरा. उन्होंने 24 घंटे से कम समय में हिंसा ग्रस्त इलाकों का दो बार दौरा किया, हालातों को समझा और फिर इससे निपटने की रणनीति बनाई.

उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, भजनपुरा, यमुना विहार, शिव विहार, मौजपुर और चांद बाग के इलाके तीन दिनों तक हिंसा की आग में बुरी तरह जले. इन इलाकों में अराजकता का माहौल देखकर सरकार ने हालात संभालने की जिम्मेदारी अजीत डोभाल को सौंपी. यह जिम्मेदारी मिलते ही एनएसए पूरी तरह से सक्रिय हो गए. उन्होंने 25 फरवरी की रात हिंसा ग्रस्त इलाकों का दौरा कर हालात को समझा.

अजीत डोभाल ने 26 फरवरी की शाम हिंसा ग्रस्ता इलाके मौजपुर का दौरा कर सभी को चौंका दिया. डोभाल यहां करीब एक घंटे तक हिंसा प्रभावित लोगों के बीच रहे और उनसे बातें कीं. मौजपुर में हिंसा पीड़ित हिंदू और मुस्लिम से बात करते हुए उन्होंने सुरक्षा का भरोसा दिलाया और बताया कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए है. अपनी इस दौरे में एनएसए ने लोगों से अपील की वे मिलजुलकर रहें क्योंकि हिंसा से किसी का भला नहीं होगा और इससे देश कमजोर होगा.