उत्तराखंड को एमकेपी पीजी कॉलेज के रुप में मिल सकता है पहला महिला विश्वविद्यालय

एमकेपी पीजी कॉलेज के रुप में राज्य को पहला महिला विश्वविद्यालय मिल सकता है. उच्च शिक्षा राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) डॉ.धन सिंह रावत ने कॉलेज का ट्रस्ट बनने पर इसे राज्य के पहले महिला विश्वविद्यालय के रुप में स्थापित करने की इच्छा जताई है. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के फेज टू से आवंटित दो करोड़ रुपए से कॉलेज में निर्माणाधीन विकास कार्यों के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.रावत ने इसे भविष्य में महिला विवि के रुप में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि कॉलेज का अपना ट्रस्ट बनता है तो सरकार इसे राज्य के पहले महिला विश्वविद्यालय के रुप स्थापित करेगी.

पाठशाला के रुप में हुई थी शुरुआत
महादेवी कन्या पाठशाला पीजी कॉलेज की शुरुआत एक पाठशाला के रुप में हुई थी. दून के प्रतिष्ठित बैरिस्टर ज्योति स्वरुप की पत्नी महादेवी ने वर्ष 1902 में कन्या पाठशाला की स्थापना की थी. जो 1911 में हाईस्कूल, 1931 में इंटरमीडिएट कॉलेज और फिर 1943 में डिग्री कॉलेज बना. वर्ष 1961 में इसे डीम्ड पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की मान्यता प्राप्त हुई. यह दून के सबसे पुराने पीजी कॉलेजों में से एक हैं. जिसमें आज करीब 3600 छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं.

विवि बना तो दूर होंगी समस्याएं
वर्तमान में अशासकीय कॉलेज के रुप में संचालित यह कॉलेज महिला विवि बनता है, तो कॉलेज में फैकल्टी और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की कमी भी दूर होगी. वर्तमान में यहां 40 प्रतिशत टीचिंग और 30 प्रतिशत ही नॉन टीचिंग स्टाफ ही कार्यरत है. महिला विवि बनने पर यहां शिक्षक और कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ अन्य सुविधाएं विकसित होंगी.

अगर यह कॉलेज राज्य का पहला महिला विवि बनता है, तो यह हमारे लिए गौरव की बात होगी. कॉलेज की भौगोलिक स्थिति अच्छी है. शहर के मध्य में स्थित होने के चलते महिला विवि के रुप में स्थापित होने पर छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा.
डॉ.रेखा खरे, प्राचार्य एमकेपी पीजी कॉलेज.