होलाष्टक आज से शुरू, जानें महत्व और नियम

फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि से होलाष्ट हो जाते हैं जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि (होलिका दहन) तक पूरे 8 दिन तक रहते हैं. इस साल 2020 में होलाष्टक 3 मार्च दिन मंगलवार से शुरू होकर 10 मार्च दिन मंगलवार तक रहेगा.

हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार होलाष्टक के 8 दिनों तक भूलकर भी कुछ ऐसे शुभ कार्य है जिन्हें नहीं करना चाहिए. जानें होलाष्टक के बारे में एवं होलाष्टक के दौरान कौन-कौन से कार्य नहीं करना चाहिए.

शास्त्रोंक्त मान्यता है कि होलाष्टक के इन 8 दिनों में सभी नवग्रहों का स्वभाव अत्यधिक गुस्से वाला हो जाता है. होलाष्टक की शुरुआत से ही प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बहुत तेजी से होने लगता है. इस समय होलिका दहन के लिए लकड़ियां एकत्रित की जाती है.

एक कथा यह भी शास्त्रों में आती है कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ही कामदेव को भगवान शिवजी ने भस्म किया था और आठ दिन बाद उनके पुनर्जीवन का आशीर्वाद कामदेव की पत्नि रति को मिला था.

होलाष्टक के 8 दिनों तक इन कार्यों को करने से बचना चाहिए-

1- होलाष्टक के इन 8 दिनों में विवाह, मुंडन, ग्रहप्रवेश या अन्य शुभ कार्यों को करने से बचना चहिए.

2- होलाष्टक पर नए घर का निर्माण और विवाह जैसे शुभ कार्य ना करें, ऐसा करने से घर में हमेशा कलह-क्लेश और विवाह के टूटने के आसार हो जाते हैं.

3- होलाष्टक पर नए व्यापार की शुरुआत भी ना करें, इससे व्यापार में अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

4- होलाष्टक पर नए वस्त्र आभूषण खरीदने से भी बचना चाहिए, ऐसा करने से चोरी होने की आशंका बढ़ जाती है.

5- होलाष्टक के दौरान नया वाहन भी खरीदने से बचें, अन्यथा वाहन के अंदर बार-बार खराबी आ सकती है, या फिर कोई दुर्घटना होने का भय रहता है.