उत्तराखंड टुरिस्म शुरू कर रहा है हेली सर्विस, अब आप जा सकेंगे चाईना बार्डर तक

अब पहाड़ों की सैर में सैलानियों को और आनंद आएगा. क्‍योंकि केदारनाथ घाटी के बाद अब उत्तराखंड के कई अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से सैर हो सकेगी. राज्य में 26 जनवरी 2020 से इस योजना के शुरू होने की उम्मीद है. पहले चरण में देहरादून से दो उड़ानें शुरू करने की योजना है. देहरादून से गोचर और चिन्यालीसैण के लिए यात्रा शुरू होगी. DGCA की हरी झंडी के बाद उत्तराखंड की घाटियों में हेलीकॉप्‍टर उड़ते दिखेंगे. इन रूटों को खोलने से चीन सीमा पर पहुंचना भी आसान होगा.

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के दौरान देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली में कई हेलीकॉप्‍टर सर्विस प्रोवाइडर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सबसे ज्यादा मांग रुद्रप्रयाग जिले में हेली सर्विस की रहती है. यहां से केदारनाथ धाम के लिए सीधी हेली सर्विस का फायदा लाखों श्रद्धालु उठाते रहे हैं. कई कम्पनियां देहरादून से सीधे केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के लिए भी सेवा उपलब्ध कराती हैं. लेकिन अब राज्य के दर्जन भर से ज्यादा नये हवाई मार्ग खोले जा रहे हैं.

बदरीनाथ यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव गोचर और गंगोत्री यात्रा के रूट पर पड़ने वाले चिन्यालीसौण के लिए हेली पहले चरण में शुरू होने जा रही है. देहरादून-गोचर मार्ग की दूरी मात्र 30 मिनट में पूरी हो सकेगी. इस सफर के लिए यात्रियों को तीन से साढ़े तीन हजार रुपये खर्च करने होंगें. जबकि गोचर के लिए 4000 रूपये से ज्यादा किराया चुकाना होगा. इस सफर को पूरा करने के लिए 40 मिनट का समय लगेगा.

हवाई सफर की शुरुआत से राज्य के पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है. देहरादून- गोचर हवाई मार्ग खुलने के बाद खूबसूरत पर्यटक स्थल औली और फूलों की घाटी सहित सिक्खों के पवित्र स्थल हेमकुंट साहिब की यात्रा भी आसान होगी. इसी तरह देहरादून-चिन्यालीसौण मार्ग खुलने से गंगोत्री और गोमुख की यात्रा आसान होगी.

गोचर और चिन्यालीसौण सबसे ज्यादा आपदा प्रभावित जिलों चमोली और उत्तरकाशी में आते हैं. मानसून के दौरान इन दोनों जिलों के कई इलाकों में आना-जाना रुक जाता है. हालांकि ऑल वेदर रोड का कंस्‍ट्रक्‍शन तेजी से चल रहा है, फिर भी रोड से पंहुचने में अच्छा खासा समय लगता है.

उत्तराखंड की सीमाएं चीन से भी लगती हैं. केंद्र सरकार लंबे समय से चीन सीमा तक बुनियादी सुविधाओं को विकसित कर रही है. रणनीतिक तौर पर ऑल वेदर रोड और कर्णप्रयाग तक रेल लाइन इसी रणनीति का हिस्सा है. ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक तौर पर हवाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए इस योजना को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

साभार – ज़ी बिज़नस