अल्मोड़ा: उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी, एक बार घूम आइये

प्रकृति की गोद में बसा अल्मोड़ा अपने आप में एक एक खुबसूरत पर्यटन स्थल है, दूर दूर तक फैले बर्फ की चोटियाँ इसे और भी खूबसूरत बनाती है, चीड, देवदार के घने जंगलों से भरा मन को रोमांचित करता है और तन को ठंडी -ठंडी हवा देता है. यहाँ की एक खास बात यहाँ के मकान पहाड़ नुमा बनाये जाते है जीसमे चीड़, देवदार, तुनी की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है. और ये मकान शरद ऋतू के समय गरम और गर्मियों के समय ठंडक देते है.

ग्रीष्मकाल के समय पहाड़ियों को देखने लायक होता है बुरांस के फूल यहाँ की खूबसूरती को और चार चाँद लगा देते है. मंदिर-कुमाऊं के प्रसिद्ध लोक-देवता गोल देवता का मंदिर नन्दा देवी का मंदिर कसार देवी मंदिर यहाँ से आप पर्वतराज हिमालय के दर्शन भी कर सकते है. अल्मोड़ा के आस पास का सौंदर्य कटारमल मन्दिर जो अल्मोड़ा से महज 17 किलोमीटर की दुरी में मोटर मार्गः कोशी होते हुए कटारमल को वहाँ से 3 किलोमीटर कच्ची सड़क कटारमल के सूर्य मन्दिर तक जाती है.

कहा जाता है कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाहर जो झलक है, वह कटारमल मन्दिर में आंशिक रुप में दिखाई देती है यहाँ की मूर्तियाँ बारहवीं शताब्दी की बतायी जाती है सूर्य भगवान की मूर्ति सूर्य पद्मासन लगाकर बैठे हुए हैं. यह मूर्ति एक मीटर से अधिक लम्बी और पौन मीटर चौड़ी भूरे रंग के पत्थर में बनाई गई है.

यहाँ से आगे जाकर कठपुर्निया से एक मोटर मार्ग माता स्याही देवी (सीतला माता ) को जाता है सीतला देवी का यहां प्राचीन मंदिर है. इस देवी की इस सम्पूर्ण क्षेत्र में बहुत मान्यता है. इसीलिए सीतलादेवी के नाम से ही इस स्थान का नाम सीतलाखेत पड़ा है.

एक मोटरमार्ग मजखाली होते हुए रानीखेत को जाता है ये अपने आप में एक रमणीय स्थान है दूर दूर से सैलानी यहाँ घूमने आते है. कुछ दिनों के लिए तो आएये हमारे अल्मोड़ा में क्या पता यहाँ की खूबसूरती आप का मन मोह ले फिर आप भी कहे कितना प्यारा कितना न्यारा है ये अल्मोड़ा हमारा!

साभार -श्याम जोशी