अल्मोड़ा के डोल आश्रम में स्थापित दुनिया का सबसे बड़ा श्री यंत्र

अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा ब्लाक के डोल आश्रम में दुनिया का सबसे बड़ा श्री यंत्र स्थापित किया गया है. इस श्री यंत्र को देखने के लिए देशभर से लोग यहां पर पहुंच रहे हैं. बड़ी संख्या में साधु संत भी यहां पर पहुंचे हुए हैं. डोल आश्रम के संत बाबा कल्याण दास ने दावा किया कि आश्रम में 1670 किलो वजन का श्री यंत्र स्थापित किया गया है. यह दुनिया का सबसे वजनी श्रीयंत्र है. दुनिया में अब तक जो भी श्री यंत्र लगाए गए हैं.

वह इस वजन से कम हैं. उन्होंने बताया कि आश्रम में श्री यंत्र की स्थापना कर दी गई है. आगामी 29 अप्रैल तक आश्रम में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा. चारधाम यात्रा रू केदारनाथ के लिए घोड़ा-खच्चर और डंडी-कंडी का ये है किराया, जानिए 5 वें धाम का दिया जायेगा दर्जा श्री यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पहुंचे राज्यपाल डा. केके पॉल ने कहा कि क्षेत्र की सुन्दरता से अभिभूत होकर हमारे पर्वतीय क्षेत्र जहां एक ओर हमें घने जंगलों से पानी की उपलब्धता बनाये रखने में सहायक है वहीं दूसरी ओर यहां शांत वातावरण को देखकर बाहर से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर बरबस आकर्षित करते हैं. उन्होंने कहा कि यहां पर वास्तुकला का ध्यान रखने के साथ-साथ नवग्रहों की स्थापना भी यहां पर की गई है.

चार धामों की तरह यहां पर भी अवस्थापना विकास कर इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जायेगा और उत्तराखण्ड का यह 5वां धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जायेगा. श्रीयंत्र का खास है महत्व हिन्दू धर्म में श्री यंत्र का बहुत खास महत्व माना जाता है. क्योंकि यह यंत्र धन की देवी श्री लक्ष्मी का यंत्र होता है. शास्त्रों में कहा गया है की जहां श्री यंत्र की स्थापना होती है वहां श्री का वास होता है और चाहकर भी देवी उस स्थान को छोड़कर नहीं जातीं. हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी रुष्ट होकर बैकुंठ चली गईं थी,उनके जाते ही धरती और देवलोक में त्राहि त्राहि मच गई.

तब देव गुरु बृहस्पति ने उन्हें आकर्षित करने और वापस बुलाने के लिए “श्री यंत्र” स्थापना और पूजा का मार्ग सुझाया. जिसके पश्चात् मां लक्ष्मी पुनः धरती पर लौट आईं. तभी से श्री यंत्र के पूजन का विधान है. ये है यंत्र यह एक तरह की ज्यामितीय आकृति है जो मन्त्रों का भौतिक स्वरुप होती है. किसी विशेष शक्ति या मंत्र को अगर किसी रूप में ढाला जाए तो यंत्र का निर्माण होता है. यंत्र में आकृति, बिन्दुओं और रेखाओं का इस्तेमाल किया जाता है. एक भी रेखा, बिंदु या आकृति गलत होने से पुरे यंत्र का अर्थ बेकार हो सकता है