‘मैं अपने को फारवर्ड समझ रहा था, BJP ने मुझे बैकवर्ड बना दिया’

राज्‍यसभा चुनाव में सपा के समर्थन वाले बीएसपी प्रत्‍याशी की पराजय के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्‍ता और धनबल का दुरुयोग तो भाजपा का चरित्र है. राज्‍यसभा चुनाव में यह फिर उजागर हो गया. चुनाव में एक दलित उम्‍मीदवार के खिलाफ भाजपा की साजिश की वजह से अगले चुनावों के लिए सपा और बसपा का गठबंधन और मजबूत हुआ है.

अखिलेश ने दोहराया कि कन्‍नौज से सांसद उनकी पत्‍नी डिंपल यादव आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी, क्‍योंकि उनके खानदान पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता है. उन्‍होंने पलटवार करते हुए कहा कि राजनाथ सिंह, कल्‍याण सिंह, रमन सिंह, शिवराज सिंह चौहान जैसे भाजपा नेता परिवारवाद चला रहे हैं. उनके परिवार के लोग राजनीति में हैं. मेरी पत्‍नी चुनाव नहीं लड़ेंगी. ऐसे में इन बीजेपी नेताओं को भी उदाहरण पेश करना चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, और केवल आरोप लगाते हैं, तो मैं भी अपना मन बदल सकता हूं.

यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान लखनऊ-आगरा एक्‍सप्रेस वे परियोजना, मेट्रो रेल प्रोजेक्‍ट जैसे विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ने वाले सपा नेता अखिलेश यादव ने जब से बसपा के साथ तालमेल किया है, तब से राजनीतिक विश्‍लेषकों के अनुसार उन्‍होंने सामाजिक न्‍याय के लिहाज से आबादी के हिसाब से हक की बात कहनी शुरू कर दी है.

इस संबंध में बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्‍यू में अखिलेश यादव ने कहा कि आरक्षण के आधार पर पिछड़ों और दलितों को 50 फीयद के दायरे तक सीमित रखा जा रहा है, जबकि आबादी के लिहाज से लोगों को उनका हक मिलना चाहिए.

जब उनसे पूछा गया कि विकास के साथ-साथ बीएसपी के साथ तालमेल के बाद वह सामाजिक न्‍याय के नारे को क्‍यों उछाल रहे हैं तो अखिलेश यादव ने कहा कि मैं अपने आप को फॉरवर्ड समझ रहा था लेकिन बीजेपी ने मुझे बैकवर्ड बना दिया. इसके लिए उनका शुक्रिया.

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि बसपा के साथ उनका तालमेल लंबा चलेगा. बीजेपी के यूपी में अति-पिछड़ों और अति-दलितों को आरक्षण के देने के प्रस्‍ताव पर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि ये सब जुमलेबाजी है. हमारा तो बस इस पर यही कहना है कि अब हम लोगों को कितना बांटोगे?

इससे पहले अखिलेश यादव ने कहा था, ‘मैं उपचुनाव में सपा को मिली जीत को बहुत बड़ी मानता हूं, क्‍योंकि उनमें से एक सीट मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और दूसरी सीट उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने छोड़ी थी. जो लोग (योगी) देश भर में घूम-घूमकर भाजपा के लिए प्रचार कर रहे थे, वे अपनी ही सीट नहीं बचा सके. इससे पूरे देश में संदेश गया है और कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच यह विश्‍वास जागा है कि अगर बीजेपी को उसके गढ़ में पराजित किया जा सकता है तो कहीं भी हराया जा सकता है.”

मायावती ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ”गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर हुए उपचुनाव से पहले बीएसपी और सपा साथ आए और इसका पूरे देश में सकारात्मक संदेश गया. उपचुनावों में दोनों के साथ आने का असर दिखा और बीएसपी ने सपा के उम्मीदवारों का समर्थन किया जिसके फलस्वरूप बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी की कोशिश रही कि किसी भी तरह हम दोनों दलों में फूट डलवाई जाए और अगले साल लोकसभा चुनाव में दोनों दल साथ न नजर आएं. बीजेपी की यह साजिश पूरे दिन राज्यसभा वोटिंग के दौरान देखने को मिली.”

उन्होंने कहा, ‘‘बीएसपी उम्मीदवार को हराकर बीजेपी, सपा के साथ हमारे तालमेल पर कोई असर नहीं डाल पाएगी और 2019 के आम चुनाव में उसे इसका परिणाम भुगतना होगा.’

मायावती ने कहा, ”बीजेपी के लोग सपा-बीएसपी दोस्ती में स्टेट गेस्टहाउस कांड की याद दिलाते है, यहां मैं साफ कर दूं कि दो जून 1995 में जब राजधानी में स्टेट गेस्टहाउस कांड हुआ था तो सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव उस समय राजनीति में नहीं थे, इसलिये अखिलेश को उस कांड के लिये जिम्मेदार ठहराना गलत है. भारतीय जनता पार्टी सस्ती लोकप्रियता पाने के लिये सपा के खिलाफ स्टेट गेस्टहाउस कांड की याद दिलाती है.’’

उन्होंने कहा, ”वर्तमान बीजेपी सरकार इस बात को जनता के सामने क्यों नहीं लाती है कि जिस पुलिस अधिकारी की मौजूदगी और संरक्षण में सरकार द्वारा स्टेट गेस्टहाउस कांड करवाया गया था, अब उसी पुलिस अधिकारी को बीजेपी की योगी सरकार ने प्रदेश का पुलिस प्रमुख अर्थात डीजीपी बनाया हुआ है. यह सब हमारे लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.”