पिछले साल दुनियाभर में भूख से 12 करोड़ से अधिक लोगों के मरने का खतरा : संयुक्त राष्ट्र

एक रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र को पिछले साल यौन उत्पीड़न की 138 शिकायतें मिलीं, जिसमें से तकरीबन आधी संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और विशेष राजनीतिक मिशनों पर भेजे गए कर्मियों के खिलाफ हैं. ऐसे अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को लागू करने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अपनी एक रिपोर्ट में 14 मार्च कहा था कि कर्मियों के खिलाफ लगने वाले ऐसे आरोपों में 2016 के 165 मामलों के मुकाबले 2017 में 138 मामले आए हैं.

यौन उत्पीड़न और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया में सुधार की विशेष समन्वयक जीन होल लुते ने 13 मार्च को कहा था कि रिपोर्ट इस संदेश को स्पष्ट करता है कि संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले काम करने वाला कोई भी व्यक्ति/कर्मी यौन उत्पीड़न से जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह उनकी मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है. लुते ने कहा कि 2017 के आंकड़े दिखाते हैं कि आरोपों की संख्या में कमी आई है.

दुनियाभर में भूख के कारण मरने के कगार पर पहुंच गए लोगों की संख्या पिछले साल बढ़कर 12 करोड़ 40 लाख हो गई. अगर इन लोगों को जल्द ही भोजन नहीं मिला तो इनकी मौत होने का खतरा है. संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी के प्रमुख डेविड बीसली ने यह जानकारी देते हुए बताया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग एक- दूसरे को गोली मारने से भी नहीं कतराते.

उन्होंने वीडियो लिंक के जरिए बीते 23 मार्च सुरक्षा परिषद को बताया कि भूख से जूझ रहे तकरीबन तीन करोड़ 20 लाख लोग चार संघर्षरत देश सोमालिया, यमन, दक्षिण सूडान और उत्तर पूर्व नाइजीरिया में रह रहे हैं. इन देशों को पिछले साल अकाल की स्थिति से बचा लिया गया.

विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि भूख और संघर्ष के बीच संबंध विध्वंसकारी है. संघर्ष से खाद्य असुरक्षा पैदा होती है और खाद्य असुरक्षा से अस्थिरता तथा तनाव उत्पन्न होता है जिससे हिंसा फैलती है. बीसली ने कहा कि वैश्विक रूप से लंबे समय से भूखे 81 करोड़ 50 लाख लोगों में से 60 फीसदी लोग संघर्षरत इलाकों में रहते हैं और उन्हें यह पता नहीं होता कि अगली बार खाना कहां से मिलेगा.