अन्ना की हुंकार : आज से रामलीला मैदान से मोदी सरकार के खिलाफ बजेगी रणभेरी

मशहूर समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ रामलीला मैदान से आंदोलन छेड़ने जा रहे हैं. पिछली बार उनके निशाने पर केंद्र मनमोहन सिंह सरकार थी, जबकि इस बार मोदी सरकार है. उनकी मांग किसानों के हक के लिए ठोस कदम की है. वो किसानों की सुनिश्चित आय, पेंशन, खेती के विकास के लिए ठोस नीतियों समेत कई मांगों को लेकर शुक्रवार सुबह से धरने पर बैठ रहे हैं.

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अन्ना को रामलीला मैदान में शुक्रवार से विरोध प्रदर्शन की अनुमति दे दी. सभी सुरक्षा पहलुओं की जांच और पर्याप्त व्यवस्था करने के बाद यह अनुमति दी गई. हजारे और उनके समर्थक महाराष्ट्र सदन से सबसे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे. वह शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीदी पार्क भी जाएंगे और फिर रामलीला मैदान के लिए रवाना होंगे, जहां 2011 में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और अनशन किया था.

इससे पहले अन्ना को मनाने की सारी कोशिशें विफल हो चुकी हैं. इन कोशिशों के तहत महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन अहमदनगर जाकर उनसे मिले थे, लेकिन ये कोशिश विफल रही. गिरीश महाजन ने बताया कि लोकपाल और किसानों को लेकर अन्ना की कई मांगें हैं, जो तुरंत पूरी नहीं हो सकतीं. गिरीश महाजन ने स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए अन्ना हजारे से सत्याग्रह वापस लेने की अपील की.

इससे पहले पटना के दौरे पर पहुंचे समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा था कि जिस सूचना के अधिकार कानून को उन्होंने लड़कर बनवाया था वो कानून आज कमजोर हो गया है. उन्होंने वर्तमान केन्द्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि इस सरकार ने इस कानून को कमजोर कर दिया है. इनके दिमाग में सत्ता-पैसे का खेल चल रहा है. इसलिए उन्होंने तय किया है कि किसानों की प्रमुख मांगों को लेकर दिल्ली में करो या मरो आंदोलन करेंगे.

अन्ना हजारे ने कहा कि आपको याद होगा कि हम 16 दिनों तक सिर्फ पानी पर अनशन पर दिल्ली में बैठे थे और अंत में सरकार को झुकना पड़ा. कानून तो बन गया है, लेकिन यह अब ठीक से काम नहीं कर रहा है. लोगों को सूचनाएं नहीं मिल रही हैं. अन्ना हजारे ने कहा कि हमारा कहना है कि सरकार के नियंत्रण में जो भी आयोग है, जैसे कृषि मूल्य आयोग, चुनाव आयोग, नीति आयोग या इस तरह के अन्य आयोग से सरकार का नियंत्रण हटना चाहिए और उसे संवैधानिक दर्जा मिलना चाहिए. ऐसे किसान जिसके घर में किसान को कोई आय नहीं है उसे 60 साल बाद 5000 हजार रुपया पेंशन दो. संसद में किसान बिल को पास करो. क्योंकि हमारा संविधान सभी को जीने का अधिकार देता है. इस बार जो लड़ाई होगी वो आर-पार की होगी.