फेसबुक डाटा लीक मामला: मार्क जुकरबर्ग ने तोड़ी चुप्पी, दिया यह बयान

फेसबुक डाटा लीक का मामला गर्माता जा रहा है. इसी विवाद के बीच फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अपनी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने मुद्दे को लेकर फेसबुक पर पोस्ट लिखा है. जुकरबर्ग ने लिखा कि हम अपनी गलती कबूलते हैं. कंपनी ने इस मामले में अभी तक कई कदम उठाए हैं और आगे भी कड़े कदम उठा सकती है. उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि लोगों के डेटा को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है, अगर हम इसमें फेल होते हैं तो ये हमारी गलती है.

मार्क ने कहा कि हमसे कई गलतियां हुई हैं लेकिन इसको सुधारने पर काम किया जा रहा है. मार्क ने लिखा कि फेसबुक को मैंने शुरू किया था, इसके साथ अगर कुछ भी होता है तो इसकी जिम्मेदारी मेरी ही है, हम अपनी गलतियों से सीखने की कोशिश करते रहेंगे, हम एक बार फिर आप सबका विश्वास जीतेंगे. साथ ही जकरबर्ग ने बताया कि 2007 में उन्होंने फेसबुक पर कई नई चीजें अपडेट की थी जिसमें जन्मदिन, एड्रेस बुक, मैप्स जैसे कई एप्स शामिल थे इसके जरिए यूजर्स के दोस्त कौन हैं जैसी जानकारियां हासिल की गई थी.

2013 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चर एलेक्जेंडर कोगन ने एक पर्सनल क्विज़ एप बनाया, जिसे करीब 3 लाख लोगों ने इंस्टाल किया था. इसमें कुछ पर्सनल डेटा भी मांगा. इससे सिर्फ उन तीन साख लोगों का डाटा ही शेयर नहीं हुआ बल्कि आगे उनके दोस्तों की भी डाटा शेयर हो गया. जकरबर्ग ने अपने पोस्ट में लिखा कि पिछले हफ्ते में हमें पता लगा कि कंपनी ने यूजर्स का डेटा डिलीट नहीं किया है जिसके बाद हमनें उन्हें हमारी सर्विस को यूज़ करने से बैन कर दिया.

ऐसे रोकेंगे डेटा चोरी होने से
जुकरबर्ग ने बताया कि फेसबुक अब सभी एप्लिकेशन की जांच करेगा, जो उनके साथ जुड़ी हुई हैं जो भी डेवलपर ऑडिट करवाने को राज़ी नहीं होगा, उसे बैन किया जाएगा. इतना ही नहीं अब एप को सिर्फ नाम, प्रोफाइल फोटो और ईमेल एड्रेस तक ही सीमित रखा जाएगा. उन्होंने बताया कि हम अगले एक महीने में न्यूज़ फीड में कुछ बदलाव करेंगे, जिससे यूज़र कुछ एप से अपने आप को साइन आउट कर सकेगा. ये टूल अभी भी सेटिंग में मौजूद है, लेकिन अब इसे न्यूज़ फीड में लाया जाएगा.

क्या है मामला
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की मदद करने वाली एक फर्म ‘कैम्ब्रिज एनालिटिका’ पर लगभग 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के निजी जानकारी चुराने के आरोप लगे हैं. इस जानकारी को कथि‍त तौर पर चुनाव के दौरान ट्रंप को जिताने में सहयोग और विरोधी की छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल किया गया.

वहीं भारत ने फेसबुक को आगाह किया कि यदि उसने देश की चुनाव प्रक्रिया को किसी भी अवांछित तरीके से प्रभावित करने का प्रयास किया तो उसे कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. अमेरिका के नियामक द्वारा फेसबुक के खिलाफ प्रयोगकर्ताओं की गोपनीयता के संभावित उल्लंघन की जांच की जा रही है. सूचना प्रौद्योगिकी और कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने आज कहा कि सरकार प्रेस, भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा समर्थन करती है.