‘सख्त कदम नहीं उठाए गए तो अमेरिका पर रासायनिक हमला कर सकता है रूस’

संयुक्त राष्ट्र।…. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने ब्रिटेन के साथ एकजुटता दिखाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए तो रूस न्यूयॉर्क या संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के शहरों पर रासायनिक हमला कर सकता है. हेली ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पिछले सप्ताह रूस के पूर्व जासूस व उनकी बेटी पर हुए नर्व एजेंट हमले के बाद ब्रिटेन के साथ खड़ा है.

हेली ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में यह बयान दिया. उन्होंने रूस पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया और सख्त कार्रवाई की मांग की.

हेली ने कहा कि अमेरिका बिना कारण के रूस की आलोचना नहीं करता है. उन्होंने कहा कि अगर रूस रासायनिक हथियारों से अपने दुश्मनों की हत्या नहीं करेगा, बच्चों पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के लिए सीरिया की मदद नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करेगा तो अमेरिका उसकी आलोचना नहीं करेगा.

हेली ने कहा कि यदि हमने इस समस्या के समाधान के लिए त्वरित कदम नहीं उठाए तो सैलिसबरी आखिरी स्थान नहीं होगा, जहां रासायनिक हथियार का इस्तेमाल हुआ है. वह न्यूयॉर्क या संयुक्त राष्ट्र के किसी भी सदस्य देश पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटिश अधिकारी जोनेथन एलन ने बताया कि रूस को 13 मार्च तक का समय दिया गया था कि आखिर नर्व एजेंट सैलिसबरी पहुंचा कैसे। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि रूस का नर्व एजेंट पर से नियंत्रण खत्म हो गया है.

पूर्व जासूस को जहर देने पर उठा विवाद रूस के पूर्व जासूस सर्गेई स्क्रिप्ल और उनकी बेटी यूलिया पर ब्रिटेन के सैलिसबरी में कथित तौर पर नर्व एजेंट से हमला हुआ था। ब्रिटेन ने रूस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया, लेकिन रूस ने इस दावे को खारिज कर दिया. जवाबी कार्रवाई में ब्रिटेन ने रूस के 23 राजनयिकों को निष्कासित करने की भी घोषणा कर दी.

पूर्व रूसी जासूस पर नर्व एजेंट हमले के बाद ब्रिटेन ने नया रासायनिक हथियार रक्षा केंद्र बनाने की घोषणा की है. इस पर 4.8 करोड़ पाउंड (करीब 435 करोड़ रुपये) खर्च होगा. इसके अलावा एंथ्रेक्स से बचने के लिए हजारों ब्रिटिश सैनिकों का टीकाकरण किया जाएगा.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री गेविन विलियम्सन ने कहा कि हम रसायन विश्लेषण और रक्षा को अग्रणी बनाने के लिए नया केंद्र बनाएंगे. यह केंद्र मौजूदा पोर्टन डाउन परिसर में बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि न केवल रूस बल्कि कई देशों से रासायनिक हमले का खतरा बढ़ रहा है.

पोर्टन डाउन ब्रिटिश सेना का गुप्त अड्डा है, जहां पूर्व रूसी जासूस को दिए गए जहर का विश्लेषण किया गया था. इसका आधिकारिक नाम डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी लेबोरेट्री है. इसमें करीब 3,000 वैज्ञानिक काम करते हैं. इसका वार्षिक बजट 50 करोड़ पाउंड है. पहले विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के गैस हमले से निपटने के लिए 1916 में इसकी स्थापना की गई थी.

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध का पालन करते हुए पोर्टन डाउन में रक्षात्मक प्रकृति का अनुसंधान होता है.