उत्तराखंड में यूरोप की तर्ज पर बनेंगे रोपवे व फनिक्युलर । 1400 करोड़ की योजना का खाका तैयार

कुमाऊं व गढ़वाल मंडल के उच्च हिमालयी क्षेत्र में न तो परिवहन की कोई सुविधा है, न सुगम रास्ते ही. सड़क बनाने में जहां फॉरेस्ट क्लीयरेंस का अड़ंगा रहता है, वहीं पहाड़ की मिट्टी काटने से भूस्खलन का भी खतरा हो सकता है. ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में स्थित पर्यटक स्थलों तक सैलानियों को पहुंचाने के लिए पर्यटन विभाग ने पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर रोपवे निर्माण की योजना बनाई. विभाग ने 10 ऐसे पर्यटक स्थल चिह्नित किए हैं, जहां यूरोप की तर्ज पर रोपवे व फनिक्युलर (केबल रेल) का निर्माण किया जाएगा. 1400 करोड़ की इस योजना के लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजने तैयारी है.

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी इन स्थानों को यूरोप की तर्ज पर विकसित करने के लिए विभागीय अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने को कहा है. इसके लिए 1400 करोड़ का प्रस्ताव बनाया गया है. इसमें केंद्र सरकार जापान की सरकारी एजेंसी जायका के माध्यम से 80 फीसद धनराशि उपलब्ध कराएगी. 20 फीसद खर्च प्रदेश सरकार उठाएगी.

विभाग ने रोपवे योजना का कार्य जनवरी 2018 से शुरू करने का लक्ष्य रखा है. इन प्रोजेक्ट को 2023-24 में पूरा कर लिया जाएगा. केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद योजना के डिजाइन तैयार कर इनकी बिडिंग की जाएगी. पर्यटन विकास परिषद के निदेशक अवस्थापना आरके जोशी का कहना है कि प्रोजेक्ट में प्रदेश के 10 पर्यटक स्थलों को लिया गया है. इसके लिए प्रस्ताव इसी सप्ताह केंद्र को भेजा जाएगा.स्वीकृति मिलते प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा. इससे पर्यटकों को तो सुविधा मिलेगी ही, स्थानीय लोगों के साथ विभाग की भी आमदनी होगी. फनिक्युलर में एक जगह से दूसरी जगह तक दो केबल कार होती है जिसमें कई सवारियां बैठकर जा सकती हैं.

प्रोजेक्ट में शामिल पर्यटक स्थल

  • पंचकोटी से बौराड़ी
  • चोपता से तुंगनाथ
  • भीमताल से खारकोटक
  • पुरकुल गांव से हाथी पांव व मसूरी
  • वन से वेदिनी बुग्याल
  • गोई बरनाला से दयारा बुग्याल
  • स्नो व्यू से नैना पीक
  • रानीबाग से नैनीताल
  • उल्का देवी से चंडिका देवी व असुरचौला मंदिर
  • रोपवे सफारी इन कार्बेट लैंडस्केप