महंगी दाल बेच रहा है आपके किराने वाला, कम हो चुकी हैं कीमतें, नई दरें यहां जानें…

पिछले दिनों विभिन्न दालों की कीमतों को लेकर समूचे भारत की तरह उत्तराखंड में भी खूब बवाल हुआ. सरकार दालों की कीमतों पर अंकुश लगाने में नाकाम रही और विपक्ष मुखर होकर सड़कों पर उतर आया. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 2014 के चुनाव में लगे नारे ‘हर-हर मोदी’ को ‘अरहर मोदी, अरहर मोदी’ करके संसद में सरकार का ध्यान दालों की महंगाई की तरफ दिलाया था.

कई जगहों पर तो अरहर, मूंग और उड़द की दाल डबल सेंचुरी भी पार गई थीं. आखिर सरकार ने कदम उठाए और अब दालों की कीमतें वापस अपनी पूर्ववर्ती दामों पर पहुंच गई हैं. लेकिन कुछ व्यापारी हैं जिनका लालच लोगों की भूख से भी बड़ा है, यही कारण है कि वे अब भी ऊंची दरों पर इन दालों को बेच रहे हैं.

उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून के बाद राज्य से दूसरे सबसे बड़े शहर हल्द्वानी में अब भी अरहर, मूंग दाल और उड़द 140 व चना दाल 120 रुपये किलो बिक रही है. जबकि सरकार की कोशिशों के बाद दाल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है.

अब दिल्ली दाल मिल्स एसोसिएशन ने ग्राहकों के साथ हो रही इस धोखाधड़ी से आगाह करने के लिए दाल की कीमतें बकायदा मीडिया रिलीज के जरिए लोगों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है. उत्तरांचल टुडे इसे अपनी जिम्मेदारी समझता है कि हमारे पाठक और आम ग्राहकों को दालों की कम हुई कीमतों का फायदा मिले, इसलिए हम 27 अगस्त को रिलीज किए गए दामों को आप तक पहुंचा रहे हैं.pulses-price-list

30 हजार मीट्रिक टन दालों के आयात को मंजूरी
सरकार ने हाल में बफर स्टॉक के लिए 30,000 मीट्रिक टन अतिरिक्त दालों का आयात करने का निर्णय लिया, जिसमें 20,000 मीट्रिक टन तूर (अरहर) और 10,000 मीट्रिक टन उड़द दालें शामिल हैं. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के सचिव हेम पांडे की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई मूल्य स्थिरीकरण कोष की बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया. इस बैठक में खरीदारी और बफर स्टॉक से दालों के वितरण की समीक्षा की गई.

अबतक सरकारी एजेंसियों ने घरेलू बाजार एवं किसानों से तकरीबन 1,19,572 मीट्रिक टन दालों की खरीदारी की है और आयात के लिए 56,000 मीट्रिक टन दालों हेतु अनुबंध किए गए हैं. इस तरह बफर स्टॉक में 1,75,572 मीट्रिक टन दालें उपलब्ध हैं.

बयान में कहा गया है कि अरहर 67 रुपये प्रति किलो की दर से और उड़द 82 रुपये प्रति किलो की दर से राज्यों को मुहैया कराई जाती हैं. राज्य सरकारों के अनुरोध पर 29,000 से अधिक मीट्रिक टन दालें राज्यों को आवंटित की गई हैं, लेकिन केवल तीन राज्यों ने ही थोड़ी मात्रा में दालों का उठाव किया है.